Book Title: Jeetkalp Sabhashya
Author(s): Kusumpragya Shramani
Publisher: Jain Vishva Bharati
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________________ वर्गीकृत विशेषनामानुक्रम : परि-१५ 691 285 तिमि (मत्स्य) 551 सुग (शुक) चू पृ. 17 / तुरंग (तुरङ्ग) 1315 हंस (हंस) 1767 पिपीलिया (पिपीलिका) हत्थि (हस्ति) 801,933 बइल्ल (बैल). 404 तीर्थंकर और गणधर भल्ल (भालू) 500 गोयम (गौतम गणधर) 826 मंडुक्कलि (मेंढकी) 800 नायसुत (ज्ञातसुत) मगर (मकर) 551 मुणिसुव्वय (मुनिसुव्रत) 528,2500 मच्छ (मत्स्य) 1606 | देश (ग्राम, नगर, देश तथा क्षेत्र) मच्छि (मक्षि) 1508 आभीरग (आभीरक) 1460 मच्छिया (मक्षिका) 1606 उज्जेणी (उज्जयिनी) 2396 मयूर (मयूर) 1725 | उत्तरकुरु (उत्तरकुरु) 544 महिस (महिष) 1133, 1773, 2529 | | एरवत (ऐरवत) 434,2113 मिग (मृग) 1773 कंचणपुर (कञ्चनपुर) 381, 382 मूइंगलिया (चींटी) कुंभकारकड(कुम्भकारकट) 528 वग्गुलि (बगुली) 2167 कुसुमपुर (कुसुमपुर) 1407, 1450 वग्घ (व्याघ्र) 1392, 2012 कोंकण (कोङ्कण) 403 वच्छग (वत्सक, बछड़ा) 1365 कोसल (कौशल) 503,1395 वलवा (वलवा, घोड़ी) 1347 गिरिफुल्लित (गिरिपुष्पित) 1394 वाणर (वानर) 1474 चंपा (चम्पा) 1394,1414 वारण (वारण) 2012 णंदिग्गाम(नंदिग्राम) 826 वाल (व्याल) 500 देवकुरु (देवकुरु) 544 विग (वृक) चू पृ. 28 | पाडलिपुत्त (पाटलिपुत्र) 1444 सप्प (सर्प) 852 भरह (भरत) 434,1999 साण (श्वान) 904 मगह (मगध) 826 सारस (सारस) चू पृ. 17 महाविदेह (महाविदेह) 2100 सियाल (शृगाल) 534, 2469 मालव (मालव) 195, 933 सिवा (शिवा) 536 रायगिह (राजगृह) 1394,1405 21

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