Book Title: Jain Vidya 07
Author(s): Pravinchandra Jain & Others
Publisher: Jain Vidya Samsthan

View full book text
Previous | Next

Page 104
________________ 90 जैनविद्या सयंभू हैं 43 44 4 4 4 4 4 जुकाम 1 basierterarter महु कहा मई मइ. घेण घेणू घेणु बहू ... प्र. एकवचन द्वि. एकवचन - प्र. बहुवचन द्वि. बहुवचन देव (पु.)- देव देव देव हरि (पु.)- हरि हरि हरि हरि गामणी (पु.)- गामणी .. गामणी गामणी गामणी साहु (पु.)- साहु साहु साहु साहु सयंभू (पु.)- सयंभू सयंभू सयंमू कमल (नपुं) कमल कमल कमल कमल वारि (नपुं.)- वारि वारि वारि वारि मह (नपुं.)- महु महु महु कहा (स्त्री.)- कहा कहा । कहा . मइ (स्त्री.) मइ मइ लच्छी (स्त्री.)- लच्छी लच्छी लच्छी लच्छी घेणु (स्त्री.)- घेणु बहू (स्त्री.)- बहू 15. षष्ठ्याः 4/345 षष्ठ्याः (षष्ठी) 6/1 (मपभ्रंश में) षष्ठी विभक्ति के स्थान पर (लोप होता है)। अपभ्रंश में पुल्लिग, नपुंसकलिंग और स्त्रीलिंग शब्दों से परे षष्ठी विभक्ति के एकवचन पौर बहुवचन के स्थान पर लोप होता है । (देव+षष्ठी विभक्ति)=(देव+0)=देव इसी प्रकार सभी शब्दों के रूप होंगे। षष्ठी एकवचन षष्ठी बहुवचन देव (पु.)- देव देव हरि (पु.)गामणी (पु.)गामणी गामणी साहु (पु.) साहु सयंभू (पु.)सयंभू सयंभू कमल (नपुं.)कमल कमल वारि (नपुं.)वारि वारि महु (नपुं.) महु कहा (स्त्री.)कहा कहा. मइ (स्त्री.) मइ' लच्छी (स्त्री.)- लच्छी लच्छी घेण । (स्त्री.)घेण । घेणूबहू (स्त्री.)-- हरि साहु मह मइ

Loading...

Page Navigation
1 ... 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116