Book Title: Arhat Vachan 1999 04
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 18
________________ थी और 'शांति - पुराण' आदि शास्त्रों की सहस्रों प्रतियाँ हाथ से लिखा - लिखाकर वितरित करने के लिये सदा याद की जाती रहेंगी। विभिन्न दृष्टियों से उल्लेखनीय कुछ महत्वपूर्ण नारियाँ थीं - ग्यारहवीं शती में वनवासी के कदंब शासक कीर्तिदेव की पत्नी माललदेवी, होय्सल शासक बल्लाल द्वितीय के मंत्रीश्वर चन्दमौलि की पत्नी आचलदेवी, गंगवाड़ी के महामण्डलेश्वर वर्मदेव की पत्नी बाचलदेवी, त्रैलोक्यमल्लवीर सान्तरदेव की रानी चागलदेवी, अरूमुलिदेव यानी रक्कस गंग की पत्नी चट्टलदेवी, राजेन्द्र चोल कांगल्व की पत्नी सेठानी पद्मावती, आचार्य हेमचन्द्र की भक्त और जयसिंह सिद्धराज की जननी मीनलदेवी और पुत्री कांचनदेवी, कुमारपाल चालुक्य की रानी मोपलादेवी, चौदहवीं शताब्दी के चन्द्रवाड़ - नरेश रामचन्द्र चौहान के मंत्री की पुत्रवधू और साहु वासाधर की पत्नी उदयश्री, तौलव नरेश की श्रुतोद्धारक राजकुमारी देवमती, मेवाड़ के इतिहास में प्रसिद्ध पन्ना धाय और बालक राणा उदयसिंह की शरणदाता और दुर्गपाल आशासिंह की माता, कार्कल नरेश वीर भैररस की बहिन काललदेवी, उन्नीसवीं शती के मैसूर - नरेश चामराज की पत्नी रंभा आदि, आदि। ब्रह्मचर्य - पालन में नारी का निश्चय ब्रह्मचर्य रक्षा में दृढ़ता या अडिगता पुरुष में अधिक है या नारी में, इस प्रश्न का उत्तर कुछ भी हो, पर इतना तो कहना पड़ेगा कि ब्रह्मचर्य - पालन में नारी पुरुष की अपेक्षा अधिक अडिग हो सकती है, क्योंकि - 1. धार्मिक आस्था, संकल्प-शक्ति और सहनशीलता के, और किसी हद तक हठ-योग के, जो तत्व आम तौर पर एक नारी में होते हैं, वे तत्व ही उसे ब्रह्मचर्य - पालन में पुरुष की अपेक्षा अधिक अडिग रखते हैं। 2. काम - वासना की प्रबलता, काम - तृप्ति की कमी, काम - सेवन की अधिकता, काम - तृप्ति में पुरुष की ज्यादती, बलात्कार आदि कारणों से काम - वासना के प्रति वितृष्णा या नफरत (रिपल्सन) हो सकती है, जिससे नारी का रुझान, बल्कि आग्रह, ब्रह्मचर्य के प्रति हो सकता है। 3. साथी पुरुष की किसी कारण से शक्तिहीनता पर नारी में निराशा भी हो सकती है और सहानुभूति भी हो सकती है, दोनों स्थितियों से नारी में ब्रह्मचर्य के प्रति आग्रह बढ़ सकता है। 4. सामान्य व्यवहार, मनोविज्ञान,जीव - रसायन विज्ञान (बायो केमिस्ट्री) आदि से भी इन तथ्यों की पुष्टि होती है। ब्रह्मचर्य - पालन में नारी को पुरुष की अपेक्षा अधिक अडिग मानकर भारतीय शास्त्रकारों ने ब्रह्मचर्य की रक्षा के प्रति नारी को कम और पुरुष को अधिक सचेत करना उचित समझा, पुरुष को अनुचित या असीमित काम - सेवन से बचाये रखने को शास्त्रकारों ने कई उपाय किये - 1. वैराग्य की महत्ता और सांसारिक सुखों की सारहीनता के तरह - तरह के उदाहरण देकर विचारोत्तजक वर्णन किये। 2. ब्रह्मचर्य के लाभ बताकर उसके पालन में पुरुष को अडिग रखने के लिये कठोर नियम बनाये। 3. ब्रह्मचर्य का आजीवन पालन असंभव होने की स्थिति में सामयिक (कैजुअल) पालन का 16 अर्हत् वचन, अप्रैल 99

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