Book Title: Anuyogadwara Sutra
Author(s): Aryarakshit, 
Publisher: Sujalpur

View full book text
Previous | Next

Page 13
________________ जा-जाणहारनाभर नथी समरीख-शादतीजानीयागम से-तकि. जाजारगसगरतकाएर सरीरक्षकोयनलमालकीनरोथकीयावश्पक कोणत-तः कोणहिवशिषभत्र हारनो HERE वशय निवारण ॥७॥ गणगंसरीर भवियसरीररितेदवावस्मय आसकिजाणगसरीर रहा श्रा-श्राव याना हिन्तेरना जा-जाणतेहतु जिमरीरकह -वगनचेतना कना अधिकार समौरविसराबवउतेजाणगण रीतचिकरान वस्मय प्रावस्सएतिपरबाहिगाणजागगस्तानसरीरयंवधगयाचुय जारीणस्ति थवरच उसास्पाड चिन्खागादकायाजीजी सिं-उपासालथामसं-हाथन-मृत्यक पाठदिवानीभूमि चारहित समस्तभोगवी पायउग्राऊपानड/रीरमाणसदिनसिटीप्रमा यात्रावानरसिथावक क्षिथावकरी थारडम नपरयर सिजिशिबाउपस्निपसेयमवरीनाकोकोरकाबोधार्चजश्रामएएजस सारा रमुगलियोरतातथाअगसरकरी नमुगति पोहताबर पादेखीनई चिनियाचतारहजीववियजासिघागयंवा संघारगयेवानिसीहियागर, पछलनविये) उदयकरण वासिरिसिखायलगपासिताकाश्वश्याप्राहाणेशमएसरिरस्त ॥७॥ Etisafiatinishi FORSEEDIN

Loading...

Page Navigation
1 ... 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 ... 412