Book Title: Anjanasundari Charitram
Author(s): Muktivimalgani
Publisher: Muktivimal Jain Granthmala

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Page 7
________________ K** 2089-90 * **** परमपूज्यनिष्कलंकचारित्र-चूडामणि, तपस्वी, सकलसंवेगीशीरोमणि-तपागच्छाधीश्वर श्रीमन् पंन्यास प्रवर श्री. १००८ श्री दयाविमलजी महाराजनी आज्ञावर्ति वयोगद्ध प्रवर्तिनी साध्वीजीश्री नवलश्रीजी- जीवन चरित्र • जगत्मा सेंकडो मानवो जन्मे अने मरे छे पण जेना जीवनमां कांइ पण परोपकार, उत्तपता के गुणीयलता होय तेना जीवननेज लोको याद करे छे... प्रवर्तिनी साध्वीश्री नवलश्रीजी भद्रिकपरिणामी, गुणीयल अने घणाने संयम अने धर्मरुचि . करावनागं हता तेथी आजे पण तेमने तेमनो परिवार अने धार्मिकवृत्तिवाळी आधिकाओ याद करे छ. प्राचीन ग्रंथ भंडारो अने जिनमंदिरोथी शोभता लोंबडीमां वीसाश्रीमाळी झातिना आगेधान शेठश्री हकमचंदभाह हता. पतिना चित्तने अनुसरनार गुणीयल शीलवंती सुरजबाइने प्रथम पुत्ररत्ननी प्राप्ति थइ अने तेनुं नाम तेमना मातपिताए गुणने अनुरुप डाह्याभाइ पाडयु. आ डाह्याभाइ पछी हकमचंद शेठने त्यां पुत्रीरत्ननो जन्म थयो, तेनुं नाम कुंकुमपगलांवाळी ते पुत्रीतुं नाम केसरवाइ पाडयु. समय जतां धंधार्थे मातपिताना स्वर्गवास बाद डाह्याभाइ भावनगर सकुटुंब पधार्या. केसरबाइ पण भाइनी साथे भावनगर ************** ** ** *****09 * Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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