Book Title: Anjanasundari Charitram
Author(s): Muktivimalgani
Publisher: Muktivimal Jain Granthmala

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Page 17
________________ ॥ ॐ ही श्री पार्श्वनाथाय नमः ॥ परमपूज्य विश्ववंदनीय तपोनिधि निष्कलंक चारित्रचूडामणि सकलसंवेगीशिरोमणि तपागच्छाधिपति श्रीमत्पन्यास प्रवर श्रीदयाविमलगणिवर सद्गुरुभ्यो नमोनमः ॥ ॥ परमपूज्य सकल सिद्धांतवाचस्पति अनेक संस्कृत ग्रंथप्रणेता श्रीमत्पन्यासप्रवर श्रीमुक्तिविमलगणिवर विरचितम् ।। ॥ श्री अञ्जनासुन्दरीचरित्रम् ॥ HEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEERB ॥ तत्रादौ मङ्गलानि ॥ (वसन्ततिलकावृत्तम् ) विश्वम्भरोभवभवान्तरबन्धभेदी । मारादिवैरिगुरुवारनिवारणेशः ॥ आद्यो जिनो मुनिरनन्तउदारधामा । नाभीश तात इह वः कुशलं विदध्यात् ।। १॥ शार्दूलविक्रीडितम् ) रागद्वेषभुजङ्गदष्टनिखिलप्राणिजपा रागद्वेषभुजङ्गदष्टनिखिलप्राणिव्रजप्राणदः, शान्ति विश्वतलेऽखिले खलजनेऽप्युत्पादयन् शान्तिभः॥ शान्ताकारविभूतिविश्वशमदः शान्ति स्थितो निर्ममः, श्रीमच्छान्तिजिनेश्वरोऽखिलनतो देयाच्छिवं वोनिशम्।। २ ।। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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