Book Title: Anekant 1985 Book 38 Ank 01 to 04
Author(s): Padmachandra Shastri
Publisher: Veer Seva Mandir Trust

View full book text
Previous | Next

Page 15
________________ मेघदूत और पाश्र्वाभ्युदय के कथानकों का तुलनात्मक अध्ययन 0 श्री कपूर चन्द जैन कवि कुलगुरु महाकवि कालिदास की अमर कृति (२) वे श्लोक जिनमें द्वितीय चरण मेषदत का कोई मेघदूत न केवल संस्कृत साहित्य अपितु विश्वसाहित्य की चरण है बाकी तीन कवि रचित । ऐसे भी कुल अप्रतिम कृति है। परवर्ती काल मे अनेक जैन कवियों ने २ श्लोक हैं।' एक नवीन उद्देश्य को ग्रहण कर मेघदूत के चरणों / चतुर्थ (३) वे श्लोक जिसमें चतुर्थ चरण मेघदूत का कोई चरण चरण को लेकर समस्यापूर्ति के रूप मे अनेक पादपूति- है बाकी के तीन कवि रचित । ऐसे कुल २.५ काव्यों की रचना की ऐसे काव्यों में पाश्वाभ्युदय, नेमिदूत, श्लोक हैं।' शीलदूत, चतोदूत आदि अति प्रसिद्ध हैं। (४) वे श्लोक जिनमें प्रथम और तृतीय चरण मेघदूत के आठवी-नौवी शती के महान जैन कवि आचार्य जिन- कोई चरण हैं बाकी दो कवि रचित । ऐसे कुल सैन अपने आदि पुराण के कारण संस्कृत पुराणकारों में ९ श्लोक हैं। श्लोक है। तो महत्वपूर्ण स्थान रखते ही हैं पार्वाभ्युदय के कारण (५) वे श्लोक जिनमें प्र० और च० चरण मेघदूत के कोई संस्कृत गीतिकाव्यकारो की विदग्ध मडली मे भी वे जा बैठ चरण है बाकी दो कवि रचित । ऐसे तीन प्रलोक हैं।' हैं । मेघदूत के प्रत्येक श्लोक के एक या दो चरणो को सम (६) वे श्लोक जिनमें द्वितीय तृतीय चरण मेघदूत के कोई स्यापूर्ति के रूप में लेकर लिखा गया यह काव्य संस्कृत जैन चरण हैं बाकी दो कविरचित। ऐसा केवल १ श्लोक है।' गीतिकाव्यो में सर्वाधिक महत् कलेवर वाला काव्य है। (७) वे श्लोक जिनमे द्वितीय और चतुर्थ चरण मेघदत के जिनसेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होने श्रृंगार कोई चरण हे बाकी दो कवि रचित । ऐसे कुल १२ के वातावरण को अपनी प्रतिभा से शान्त रस मे परिणत __ श्लोक हैं। कर दिया है। (८) वे श्लोक जिनमे तृतीय चतुर्थ चरण मेघदूत के कोई ३६४ श्लोक प्रमाण प्रस्तुत काव्य की कथा वस्तु चार चरण हैं बाकी दो कवि रचित । ऐसे कुल ९७ सर्गों में बंटी है जिनमें क्रमश: ११८, ११८, ५७, ७१ श्लोक है। श्लोक हैं । समस्यापूर्ति का आवेष्टन ८ प्रकारो मे किया इसके अतिरिक्त ६ श्लोक ऐसे भी हैं जिसमें मेघदत गया है का कोई चरण नही है। ये अन्तिम मगलस्वरूप हैं और (१) वे श्लोक जिनमें प्रथम चरण मेघदूत का कोई चरण काव्य के अन्त में हैं। है बाकी तीन कवि रचित । ऐसे कुल २ पाश्र्वाभ्युदय के उक्त विवरणी को एक विवरणी श्लोक हैं। द्वारा इस प्रकार दिखाया जा सकता हैक. सर्ग मे० का मे० का मे० का मे० का मे० का मे० का म० का मे० का योग चतुर्थ १+३ १+४ २+३ +४ ३+४ चरण चरण चरण चरण चरण चरण चरण चरण द्वारा ३० १०० 27 ११८ १ प्रथम २ द्वितीय ३ तृतीय ४ चतुर्थ योग मेघदूत ६५ २३२६३ १/२ १/२ ५८ ४॥ ३५८+६=३६४ (छः श्लोकों में पादपूर्ति नही)। ६७ ४८॥ ३५८ १२०

Loading...

Page Navigation
1 ... 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138