Book Title: Abhidhan Rajendra Koshme Sukti Sudharas Part 03
Author(s): Priyadarshanashreeji, Sudarshanashreeji
Publisher: Khubchandbhai Tribhovandas Vora
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सूक्ति
मान राजेन्द्र भाग पृष्ठ
286. पंथसमा नत्थि जरा।
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37. 283.
प्रथम वयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः । प्रशमरस निमग्नं दृष्टि युग्मं प्रसन्नं ।
354 1209
342
391
34. 53. 111. 154. 225.
बहुदुक्खा हु जंतवो । बहु कम्मलेवलिताणं । बहुकूरकम्मे, जं कुव्वती मिज्जति तेण बाले । 3 बहिया उड्ढमादाय नाव कंखे कयाइवि। 3 बहुं परघरे अस्थि, विविहं खाइम साइमं । 3
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752
981
389
46. बाले य मंदिए मूढे, वज्झई मच्छिया खेलम्मि । 3 90. ' बाह्य भावं पुरस्कृत्य । 169. बाला य बुड्ढा य अजंगमाय ।
بیا
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بیا
857
108.
بیا
558.
बुद्धा हुते अंतकडा भवंति ।
बो बोही य से नो सुलभा पुणो पुणो ।
15.
بیا
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142. भणंता अकरेन्ता य। . 145. भय - वेराओ उवरए । 202. भव तण्हा लया वुत्ता, भीमा भीम फलोदया । 3
بیا
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भा
122. भारस्स जाता मुणि भुञ्जएज्जा ।
3
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3
149. 167. 168.
मन एव मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयोः। मद्दव करणं नाणं तेणे व उ जे मंदं । मद्दव करणं नाणं ।
751 8 55
3
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अभिधान राजेन्द्र कोष में, सूक्ति-सुधारस • खण्ड-3 . 137
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