Book Title: Bikaner ke Darshaniya Jain Mandir
Author(s): Agarchand Nahta
Publisher: Danmal Shankardan Nahta
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Page #1 -------------------------------------------------------------------------- ________________ શ્રી યશોવિજયજી Ibllebic 19% રિ દાદાસાહેબ, ભાવનગર, ફોન : ૦૨૭૮-૨૪૨૫૩૨૨ 522A૦૦૯ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat Www.umaragyanbhandar.com Page #2 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ला--पुष्प १६वाँ MAM - -- agar बीकानेर के दर्शनीय जैन मंदिर SPPE लेखक अगरचन्द नाहटा प्रकाशक दानमल शंकरदान नाहटा नाहटों की गवाड़ बीकानेर प्रथमावृत्ति २.०० २.१२ कि. मूल्य -) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #3 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बीकानेर के दर्शनीय जैन-मंदिर बीकानेर राजस्थान का एक प्रधान अंग है जो पहले एक अलग राज्य के रूप में था। सं० १५४५ में जोधपुर के राठोड़ वंशी राव जोधानी के पुत्र राव बीकाजी ने इसे बसाया। इसके आस-पास का प्रदेश 'जोगल' के नाम से प्रसिद्ध था । क्रमशः राज्य सीमा बढ़ती गई और यहां के साहसी व्यापारियों की समृद्धि मी। राव बीकाजी के साथ प्रोसवाल जाति के कई व्यक्ति मी साथ आये थे और उनका राज्य के संचालन व व्यवस्था में बड़ा हाथ रहा। राव बीकाजी से महाराज रायसिंहजी तक सभी प्रधान मंत्री वच्छावत वंश के थे और पीछे मी सुराणों एवं वैदों आदि का राज्य की उन्नति में बड़ा हाथ रहा। इसलिए प्रोसवाल जाति के करीब ६० गोत्रों वाले डेढ़-दो हजार घर यहाँ रहे व हैं । मत्रीश्वर कर्मचंद वच्छवत ने. जातियों और गोत्रों के अलग-अलग मोहल्ले स्थापित किये जिनमें श्रोसवालों की २७ गवाड़े याने मोहल्ले हैं। प्रत्येक गोत्र वाला प्रायः अपनी गवाड़ में ही रहता है। ऐसी सुन्दर व्यवस्था अन्यत्र शायद कहीं नहीं है । बीकानेर राज्य यद्यपि जोधपुर आदि से छोटा था, पर यहाँ जैन ज्ञान मंडार और जैन मंदिर राजस्थान के अन्य सब नगरों से अधिक है। बीकानेर की यह विशेषता विशेष रूप से उल्लेखनीय है । जैन मंदिरों की अधिकता और उनके महत्वपूर्ण होने के कारण बीकानेर की गणना जैन तीर्थों में की गई है। कविवर समयसंबर ने अपनी तीर्थ माला में अन्य तीर्य स्थानों के साथ बीकानेर का भी विशिष्ट स्मरण व वंदन किया है Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #4 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( २ ) 'बीकानेर जबंदीए, चिरनंदीये रे, अरिहंत देहरा आठ । तीर्थ ते नमुरे' ___ कविवर समय सुन्दर के समय (सं. १६८०) यहां आठ जैन मंदिर थे, जो बढ़ते-बढ़ते अब अंर्तगत मन्दिरों को लेकर करीब ३५ की संख्या तक पहुँच गये हैं । समय-समय पर अनेक स्थानों के जैन यात्री बीकानेर को तीर्थ मानते हुए यात्रा के लियेयहां आते हैं । पर यहां के मन्दिरों की पूरी जानकारी न होने से पूरा दर्शन नहीं कर पाते व उन्हे बड़ी असुविधा होती है इसलिये यहां के मंदिरों का संक्षिप्त परिचय प्रकाशित करना आवश्यक जान यह लवु प्रयास किया जा रहा है । गत १५-२० वर्षों से हमने यहां के ही नहीं, राज्य मर के मंदिरों की समस्त प्रतिमाओं के लेख और मंदिरों के इतिहास आदि के संबंधी विशेष अन्वेषण किया है। जिसके फल स्वरूप एक वृहद् सचित्र ग्रंथ 'बीकानेर जैन लेख संग्रह' के नाम से मुद्रित करवाया है, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहा है । पर जन साधारण के लिये 'तो सामान्य जानकारी ही अपेक्षित होती है, इसलिये इस छोटी सी पुस्तिका में यहां के जैन मंदिरों का अति संक्षिप्त परिचय प्रकाशित करना ही अभीष्ट है। इससे अधिक “परिचय की जिज्ञासा होगी तो दूसरे संस्करण में कुछ फोटो सहित थोड़ा विस्तृत परिचय दिया जायगा। रांगड़ी के चौक में जैन स्वधर्मशाला है जो जैन यात्रियों के ठहरने का स्थान है। अतः वहां से जो जैन मंदिरों के दर्शनों के लिये जाने का सुविधाजनक मार्ग है उसी के क्रम से यहां मंदिरों का परिचय दिया जा रहा है। १ चिन्तामणिजी (आदिनाथ चौवीसटा) का मंदिर ( कंदोईयों के बाजार के उत्तरी नुक्कड़ पर ) बीकानेर नगर की नींव पड़ने के साथ ही इस मंदिर की मी नींव डाली जाने का प्रवाद है। सं० १५६१ में राव बीकाजी के समय में इस मंदिर के बनने का Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #5 -------------------------------------------------------------------------- ________________ इस मंदिर में शिलालेख लगा हुआ है। इसकी गूलनायक आदिनाथ मुख्यचतुर्विंशति जिन की धातु मूर्ति, सं० १३८० में जिनकुशलसूरि द्वारा प्रतिष्टित मंडोर मे लाई गई यो। जैसलमेरी पीले अवर से यह सुंदर मंदिर बना हुआ है । इसके गर्भगृहों (गुभारों) में से एक में १०५० धातु प्रतिमाएं हैं जो सिरोही की लूट सं० १६३६ में मंत्रीश्वर काचन्द के प्रयत्न से यहाँ प्राप्त हुई रखी हुई हैं। इनमें नौवींदशवीं शताब्दि से १६वीं शताब्दि तक की विविध कला पूर्ण धातु मूर्तियां हैं। इतनी अधिक धातु पतिमानों का एकीकरण अन्यत्र कहीं नहीं मिलेगा। मीकानेर का गह सबसे पहला मंदिर होने के साथ साथ इतनी अधिक और प्राचीन प्रतिमानों के संरक्षण केन्द्र होने की दृष्टि से भी इस मार का बड़ा महत्त्व है । गुभारे की ये प्रतिमाएं कई वर्षों के अनन्तर किसी खास दुर्भित व रोगोपशान्ति श्रादि के प्रसंग में निकाली जाती है । मूल मंदिर में एक कायोत्सर्ग की धातु प्रतिमा गुप्त काल की बड़ी सुंदर है और मूल मादर के दाहिनी ओर प्रदिक्षणा में स० ११७६ २। परिकर व अन्य मान पट्ट आदि दर्शनीय हैं । बांई ओर शान्तिनाथ भगवान का स्वतंत्र मंदिर है । यह मूल मदिर कंदोई बाजार के उत्तरी नुक्कड़ पर अवस्थित है । इसका प्रवेश द्वार छोटा होने पर भी कला- ' पूर्ण है । १३ गवाड़ का यह पंचायती मंदिर है । २ वासुपूज्यजी का मंदिर यह उपर्युक्त मन्दिर के पास की मथेरण गली में डागों के महावा जी के पास ही है। मूलतः यह वच्छावतों का देरासर था। सं० १६३६ में सिाही को लूट से प्राप्त प्रतिमात्रों में से वासुपूज्य चतुर्विशति धातु प्रतिमा को यहाँ मूलनायक के रूप में स्थापित किया गया था। दोनों ओर दो देहरियां है । ____ पास ही में सटा हुआ दिगंबर जैन मंदिर है । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #6 -------------------------------------------------------------------------- ________________ गमा त ३ महावीरजी मंदिर ( डागों का) यह उपयुक्त मन्दिर के पास ही डागों की पोल के स मने है। मूलनायक महावीर स्वामी की प्रतिमा जैसलमेरी पाषाण की है और पास की एक देहरी में सं० ११७६ की जांगलकूप से श्राई हुई सुंदर और सपरिकर प्रतिमा है। ४ भांडासरजी सुमतिनाथजी का मंदिर यह मंदिर श्री लक्ष्मीनाथजी के मंदिर और गौशाला के पास की ऊँची भूमि पर अवस्थित है। त्रिभूमिया (तितल्ला), बड़ा विशाल और कला पूर्ण होने से सारे बीकानेर राज्य में यह जिनालय सबसे महत्वपूर्ण व दर्शनीय है। सं० १५७१ में मांडासाहद्वारा यह सुमतिनाथजी का मदिर बनाया गम । तत्कालीन राव लूणकरणजी ने इसका नाम "त्रैलोक्य दीपक" रखा, जो सर्वथा उपयुक्त है। जोधपुर राज्य के सुप्रसिद्ध कलाधाम राख कपुर के त्रैलोक्य दीपक प्रसाद की यह अनुरुति है। मंदिर के परकोटे की लंबाई १७१ से १९० फुट तक है और चौड़ाई १०६॥ से १४४॥ फुट है। समतल भूमि से इसकी ऊंचाई ११२ फुट है। इसके तीसरे तल्ले पर से बीकानेर नगर के चारों ओर का परिदर्शन बड़ा ही सुंदर होता है। इसका शिखर तो करीब ६० कोस की दूरी से (दूरबीन से ) देखा गया है। बाहर की मांति भीतर का दृश्य भी पड़ा ही सुंदर है। अनेको संम व प्रदिक्षणा को जगतो की कलापूर्ण विविध मूर्तियां बहुत ही मनोहर और दर्शनीय है। कुछ वर्षों पूर्व की गई चित्रकारी भी बड़ी सुंदर है। पास ही में सीमंधर स्वामी का स्वतंत्र मंदिर है। प्रत्येक बीकानेर श्राने वाले पानी को इस मन्दिर को तो अवश्य देखना चाहिए। ५ नमिनाथजी का मंदिर यह मांडासरजी के मंदिर के पीछे के श्री लक्ष्मीनाथ पार्क से संलग्न है। वन्छा. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #7 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वत मत्री कर्मसिंह ने सं० १५७० में इसे बनाया और १५६३ में इसकी प्रतिष्ठा हुई। यह मंदिर मी बड़ा विशाल, सुंदर और कलापूर्ण है। सामने तथा दूसरी श्रोर की फाटक के पास बगीचा होने से इसकी सुंदरता और भी बढ़ गई है। मूल मंदिर के बाहर की जैसलमेर के पत्थर की कोरणी और भीतरी प्रवेश द्वार श्रादि की बहुत बारीक और सुंदर कोरणी दर्शनीय है। ६ पार्श्वनाथजी-नाहटों की बगेची मांडासरजी के पास की नई सड़क व हमालों की बारी से गंगाशहर जाती हुई सड़क पर नाहटों की बगेची है। इसमें पार्श्वनाथ मगबान का मन्दिर और दादा गुरु कुशलमूरिजो के मकराने की बंगली में चरण हैं। इसके सामने बीकानेर के स्पापक राव बीकाजी का स्मारक है । ७ महावीरस्वामी का मंदिर (वैदों का) (श्राचारजों के चौक के पास) चिन्तामणिजी के मंदिर के बाद बना हुआ यह १४ गवाह पंचायनी जैन मंदिर है। सं० १५७ में इसकी नींव डाली गई । वैद गोत्र वालों ने इसे बनाया. इसलिये वैदों के महावीरजी के नाम से प्रसिद्ध है। इसको लेप्यमय मूलनायक सपरिकर प्रतिमा हुंदर है। सामने की ओर दो देहरियाँ हैं और पीछे की तीन देहरिया है जिनमें से प्रथम में सहस्रकणा पार्श्वनाथ जी की मूर्ति दर्शनीय है । मध्यवर्ती देहरी में गिरनार तीर्थ पट्ट और नेमि पंच कल्याणक पट्ट संगमरमर के है। इस मंदिर के सामने वो एक देहरी के भूमिगृह में ७५ धातु प्रतिमाएं पुरवित है। सामने को दूसरी देहरी में धातु की सबसे बड़ी चतुर्विशति मूर्ति है । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #8 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८ संखेश्वर पार्श्वनाथ का मंदिर यह निम्नोक्त महावीरजी मंदिर और पायचंद्र गच्छ के उपाश्रय के बीच प्रासाणियों के चौक में हैं। ६ महावीरजी का मंदिर (प्रासाणियों के चौक में) उपरोक्त संखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से सलम है । इसमें कुछ मित्ति चित्र अच्छे हैं। १० पद्मप्रभुजी का मंदिर यह प्रासाणियों के चौक के पास राव गोपालसिंहजी वैद की हवेली के पास , की गलो में पन्नीबाई के उपाश्रय से संलग्न है । यहा कुछ पुराने मित्ति चित्र हैं । ११ ऋषभदेवजी का मन्दिर ___ यह बाजार और संगड़ी चौक को निकटवर्ती नाहटों की गवाड़ में है। इसकी मूलनायक श्रादिनाथ प्रतिमा बहुत ही विशाल और सुन्दर है। ऐसी प्रतिमा अन्यत्र दुर्लभ है। सं० १६६२ चैत्र बदी ७ को अकबर प्रतिबोधक युगप्रधान जिनचन्द्र सूरिजी ने इसकी प्रतिष्ठा की । यह शत्रुजय तीर्थावतार माना जाता है। मूल गुंमारे के बाहर पाले में युगप्रधान जिनकन्दरजी की मूर्ति बड़ी सुन्दर है। मूलनायक प्रतिमा के सामने हायी पर मरूदेवो माता और मात चक्रवती बैठे हैं और मूलगुंभारे के बाहर दोनों ओर भरत और बाहुबलि की मयोत्सर्ग स्थित प्रतिमाएँ हैं। यु. जिनचंद्रसूरिजी की मूर्ति के सामने के पाले में गणधर गौतम व उसके साथ दोनों ओर गणधर सुधर्मा और जम्बूस्वामी की खड़ी मूर्तियां है। गर्ममूह के बाहर दीवाल में एक अोर ऋषभदेव का निर्वाणधाम श्रष्टापद और दूसरी बोर शर्बुजय सौर्य चित्रित Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #9 -------------------------------------------------------------------------- ________________ है। पास में पार्श्वनाथजी का स्वतंत्र मन्दिर और प्रदिक्षणा में पांच पांडव, कुन्ती, द्रौपदी, और ऋषभदेव चरण की देहरी है। . १२ शांतिनाथजी का मन्दिर ___यह भी नाहटों की गवाड़ में खरतरगच्छ की प्राचार्य शाखा के उपाश्रय के कीक सामने है। इसमें शान्तिनाथजी, गौतम स्वामी आदि की मूर्तियां दर्शनीय हैं। इसके सामने स्वरतर श्राचार्य शाखा के उपाश्रय में देवछन्दे में जैनमूर्तियां है । १३ सुपार्श्वनाथजी का मन्दिर यह शान्तिनाथजी के मन्दिर के पास, एक पाल में छत्ताबाई के उणश्रय में संलग्न है। इसमें तीर्थों के चित्रित पट्ट और ऊपर तल्ले में चौमुख समवसरण देहरी और अन्य मूर्तियां दर्शनीय हैं। १४ महावीरजी का मन्दिर (बोरों की सेरी) ___ यह नाहटों और गोलछों की गवाड़ के मध्यवर्ती बोरों की सेरी (सकड़ी गली) में उपाश्रय के सामने है। यह मन्दिर सबसे पीछे बना होन पर भी विशेष रूप से दर्शनीय है। इस संगमरमर के शिखरबन्ध कलापूर्ण जिनालय का स्वर्गीय सेठ भैरोंदानजी कोठारी ने सं० २००२ में बनाया है। इसके भित्ति चित्र बीक.नेर की चित्रशैली के बड़े सुन्दर हैं। जिनमें भगवान महावीर के २७ भव, श्रीपाल चरित्र पृथ्वीचन्द्र गुणसागर चरित्र आदि कई जैन कपानकों का सुन्दर चित्रण है। सामने के बालों में गौतम स्वामी और जिनकुशलसूर की मूर्तियां और उपर तल्ले में वासुपूज्य भगवान की एक देहरी है । | १५ कुंथुनाथजी का मंदिर यह रांगड़ी चौक में बड़े उपाश्रय के ठीक सामने बड़े मौके की जगह पर है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #10 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६ अजितनाथजी का मंदिर कुंथुनाथजी के मंदिर के थोड़े श्रागे सुगनजी के उपाश्रय के पीछे के हिस्से में उपर तल्ले में यह देहरासर रूप मंदिर है। पास में जिनकुशलसूरजी का गुरु मंदिर जिसमें दादा गुरू की जीवनी के चित्र हैं और नीचे बंगलो में उपाध्याय क्षमा कल्यास जी की सुन्दर मूर्ति है। १७ अजितनाथजी का मंदिर कोचरों के मोहल्ले में सिरोहियों के घरों के पास में पांच मंदिर है । जिनमें अजितनाथजी का शिखरबद्ध मंदिर सत्र से प्राचीन है। इसका निर्माण सं० १६६४ के श्रास पास हुआ है। सं० १६६४ की प्रतिष्ठित हीरविजयसूरिजी की मूर्ति मी इसमें सुन्दर है। सं० १८५५-७४ और १९६६ में इसका जीर्णोद्धार होता रहा । १८ विमलनाथजी का मंदिर यह अजितनाथजी के मंदिर के पास ही है । सं० १९२४ में कोचर अमीचंद हबारीमल ने इसकी प्रतिष्ठा करवाई । १६ पारसनाथजी का मंदिर बह बिमलनाथजी के मंदिर के पास ही है। सं० १८८१ में यह मंदिर बनाया गया। २० आदिनाथजी का मंदिर यह उपरोक्त मंदिर से संलग्न है । मूलनायकजी सं० १८६३ में प्रतिष्ठित है। इसमें दोनों ओर दीवालों में चित्रित तीर्थपट्ट बड़े संदर है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #11 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १ ) २१ शान्तिनाथजी का मंदिर . . यह उपरोक्त आदिनापजी के मंदिर के पास, कोचरों के उपाश्रय में देरासर के कोचरों की गुवाड़ के पीछे जेल रोड़ पर दिगबर जैन धर्मशाला और नसियांजी है। २२ पायचंदसूरिजी का मंदिर-आदिनाथ मंदिर गंगाशहर रोड यह गंगाशहर रोड पर है । कोचरों की गवाड़ से बीदासर की बारी से निकल कर इस मंदिर को जाने का मार्ग है.। यह बहुत विशाल जगह को घेरे हुए है । यहाँ सब से पहले सं० १६६२ में पार्श्वचंद्रसूरि के चरण स्थापित हुए इसीलिए इस नामसे प्रसिद्ध हैं। फिर इसी गच्छ के अन्य प्राचार्यों की शालाएं व पादुकाएं बनी। आदिनाथ मगवान का शिखरबंध मंदिर पीछे बना है। ___ काती सुदी १५ को बैंदों के महावीरजी से भगवान की सवारी निकल कर यहां जाती है और मिगसर बी २ को लौटती है । २३ रामलालजी की दादावाड़ी उपयुक्त मन्दिर के सामने महोपाध्याय वैद्यवर रामलालजी व गुरुदेव का मन्दिर है। २४ दूगड़ों की दादाबाड़ी इसी गंगाशहर रोड़ पर थोड़ा आगे जाने पर दूंगड़ों की बगेची में Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #12 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १० ) २५ पार्श्वनाथजी का मन्दिर इसी रोड़ पर थोड़े आगे कोचरों की बगेची है जिसमें हाल ही में सामने को ओर गुरू मूर्तियां और उनके पीछे पार्श्वनाथ मगवान का मन्दिर बनाया गया है । २६ गौडी पार्श्वनाथजी का मन्दिर गंगाशहर रोड़ के मध्यवतीं घूमचक्कर के पास विशाल भूमि को लिये हुए यह मन्दिर है । सं० १८८६ में इस गौडीपाश्र्व मंदिर का उद्धार हुा । पास ही में समेतशिखरजी का संगमरमर का विशाल पट्ट सेठिया अमीचन्द ने सं० १८८६ में बनाया । दीवाल में दोनों ओर जिनहर्षसूरि और मस्तयोगी ज्ञानसारजी (सामने सेठिया अमीचन्द बैठे हैं) के ऐतिहासिक चित्र हैं। बाहर एक गुरु पादुका मन्दिर में खरतरगच्छ को यह परंपरा के ७० चरण हैं। और पास ही आदिनाथजी का मन्दिर है। २७ संखेश्वर पार्श्वनाथ (सेटूजी का) मन्दिर ___यह श्री गौडी पार्श्वनाथजी के संलग्न व इसी अहाते में हैं । सं० १९२४ में यति श्री सेदजी (समुद्रसोम ) ने इसे बनवाया था। इसके पास ही मस्तयोगी मानसारजी का समाधि मन्दिर है । नरायणजी के नाम से प्रसिद्ध ये बहुत बड़े आध्यात्मिक योगी, राज्यमान्य, काव्यमर्मन्न और प्रमावक पुरुष थे। १८ वर्ष की उम्र में यहां इनका स्वर्गवास सं० १९६८ में हुआ। सं० १६०२ में इस साल में उनके चरण प्रतिष्ठित हुए। इसके पीछे, ही गंगाशहर रोड़ पर जैन कालेज है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #13 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बीकानेर के अन्य दर्शनीय स्थान बीकानेर में जैन मन्दिरों के अतिरिक्त निम्नोक्त दर्शनीय स्थान है१ नाहटा कला भवन-अभय जैन ग्रंथालय नाहटों की गवाड़ में ऋषभदेवजी के मन्दिर के ठीक सामने उपरोक्त दर्शनीय स्थान है। इसमें बीस हजार प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ, पच्चीस हजार मुदित ग्रन्थ, विविध चित्र-शैलियों के हजारों चित्र, पुरातत्व, कला की नानाविध सामग्री का विशद संग्रह है। राजस्थान का यह सबसे बड़ा निजी ग्रन्थालय व संग्रहालय है। २ बड़ा उपाश्रय इसमें दस हजार हस्तलिखित प्रन्यों का बड़ा ज्ञान मण्डार और खरतरगच्छ के बड़े श्री पूज्यजी की गादी है। ३ श्री भैरूंदानजी कोठारी का निवास भवन कोठारियों के मोहल्ले में यह मवन कला की दृष्टि से अपनी निराली विशेषता Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #14 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १२ ) रखता है। इसमें संगमरमर पत्थर को बारीक कोरणी और रणथम्भोर युद्ध श्रादि के विशिष्ट चित्र और अनेक दर्शनीय सामग्री है । ४ गगा गोल्डन जुबिली संग्रहालय (म्युजियम) सुप्रसिद्ध पबलिक पार्क के बाहर सामने के अद्यतननिर्मित गोल भवन में राज्य का सार्वजनिक पुस्तकालय और संग्रहालय है। इस संग्रहालय में पल्लू से प्राप्त विश्वविश्रु त् जैन सरस्वती की मूर्ति विशेष रूप से दशनीय है । मटनेर से प्राप्त कई जैन मूर्तियां भी इस म्युजियम में है। . ५ मोतीचंदजी खजांची संग्रह महात्मा गांधी रोड़ पर रत्नबिहारीजी के ठीक सामने खजांची बिल्डिंग में मोतीचन्दजी खजांची का प्राचीन कलापूर्ण चित्रों व हस्तलिखित ग्रन्थो का विशिष्ट संग्रह है। इनके अतिरिक्त हस्तलिखित ग्रन्य संग्रहों में प्राचार्य शाखा, जयचन्दजी, क्षमाकल्याणजी, सेठिया लाइब्रेरी, कुशलचन्द्रसूरि पुस्तकालय गोविन्द, पुस्तकालय, महावीर जैन लाइब्रेरी और महाराजा की अनूप संस्कृत लाइब्रेरी (लालगढ़) विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बीकानेर में करीब साठ-सत्तर हजार हस्तलिखित प्रतियों का विशिष्ट संग्रह है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #15 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बीकानेर के निकटवर्ती दर्शनीय स्थान १ रेल दादाजी बीकानेर के निकटवर्ती दर्शनीय स्थानों में गगाशहर रोड पर रेल दादाजी के नाम से प्रसिद्ध दादावाड़ी में जिनदत्तसूरिजी की मूर्ति, जिनकुशलसूरिजी, युगप्रधान जिनचंद्रसूरिजी श्रादि के चरण और अनेक साधु साध्धियां, श्री पूज्यनी और यतियों के स्मारक बने हुए हैं। पास ही एक अलग देहरी में खरतर गम्छ की श्राचार्य शाखा के श्रीपूज्यजी के चरण और मुख्य द्वार के पास गौत्तम स्वामी की ___२ रामनिवास-पार्श्वनाथ मंदिर यह रेल दादाजी से आगे गंगाशहर-प्रवेश के घूम चक्र के बीच में है । यहाँ पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा बांठिया समचंद ने स्थापित की । ३ आदिनाथ मंदिर-गंगाशहर यह गंगाशहर में सड़क के ऊपर ही बना हुआ है। ४ पार्श्वनाथ मंदिर-भीनासर गंगाशहर की रोड पर सीधे चलते हुए भीनासर के अंतिम सीमावर्ती कर Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #16 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १४ ) और मुरलीमनोहर के मंदिर के सामने ही यह मंदिर है। यहां की मूलनायक पार्शनाथ प्रतिमा सं० ११७१ में जिनदत्तसूरि प्रतिष्ठित सुंदर और सप्रभाव है। __५ पार्श्वनाथ मंदिर- महावीर सेनेटोरियम भीनासर और उदरामसर के मध्यवर्ती धोरा पर अवस्थित मैरूंदत्तजी प्रासोपा द्वारा स्थापित महावीर सेनेटोरियम में यह मंदिर है । ६ कुंथुनाथ देरासर-उदरामसर बीकानेर से ७ मील दूरवर्ती उदरामसर के बोयरों के बास में उपाश्रय के ऊपर तल्ले में यह मंदिर है। ७ जिनदत्तसूरि दादावाड़ो-उदरामसर यह उदरामसर गांव से लगभग १ मील पर है। जिनदत्तमूरिजी की चरण पादुकाएँ सं० १७३५ में बनाई गई। इस दादावाड़ी का जीर्णोद्धार सं० १८८३ में हुआ। सं० १८८४ से प्रति वर्ष भादौ सुदी १५ को यहाँ मेला भरता है। दादा गुरू जिनदतपूरिजी के चरण बड़े चमत्कारी है। ८ पार्श्वनाथ मन्दिर-शिवबाड़ी बीकानेर से पूर्व-उत्तर दिशा में चार मील दूर शिवबाड़ी ग्राम है। यहां पार्श्वनामजी का मंदिर लालेश्वर महादेवजी के मंदिर के सामने सं० १९३८ में यति सुगनजी के उपदेश से महाराजा डूंगरसिंहनी ने बनवाया । सावण सुदी १० को यहां एक बड़ा मेला मरता है। पास के बगीचे में एक बड़ा तालाब है और लालेश्वर महादेव के मंदिर में एक बावड़ी है। अर्षा होने पर यहां बड़ी रौनक रहती है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #17 -------------------------------------------------------------------------- ________________ है सुपार्श्वनाथ मन्दिर-ऊदासर यह बीकानेर से ६ मील दूर है। सं० १९३५ में सदारामजी गोलबा ने इस मंदिर को बनवाया। १० जिनकुशलसूरि गुरु मंदिर-नाल ___ यह बीकानेर से दक्षिण-पश्चिम ८ मील दूर गजनेर कोलायत जाने वाली सड़क पर है। यहां कुशलसूरिजी की पादुकाएँ बच्छावत कर्मसिंह ने सं० १५८० के आसपास, गुरु दर्शन पाने के अनन्तर स्थापित की । यह बहुत चमत्कारी स्थान माना जाता है। इस गुरु मंदिर का जीर्णोद्धार सं० १६६६ में भलंदानजी कोगरी ने बड़े ही सुन्दर रूप से करवाया है। गुरु चरण के ऊपर की जंगली की संगमरमर की जाली और कोरणी बहुत ही भव्य है। पाप के एक चौमुख स्तूप में महाकवि समय सुन्दरजी और उनके गुरु के चरण हैं । बाहर जिन चारित्रसूरिजी स्मृति मंदिर अभी दीपचदजी गोलका ने बनाया है, जिसमें जिनचारित्रसरिजी की मूर्ति है। सामने की शालाओं में कीतिरत्नसूरि शाखा वालों के चरण व स्तूप हैं। खरतर श्राचार्य शाखा की कोटड़ी में उनके श्रीपूज्य श्रादि के चरण हैं। काती मुदी १५ को यहां मेला लगता है और फागुन वदी ३० को पूजा, रात्रि जागरय श्रादि द्वारा गुरु भक्ति की जाती है । ११ पद्मप्रभुजी का मंदिर-नाल यह इस गुरु मन्दिर के अहाते ही में किनारे पर है। सं० १९१६ में इसकी प्रतिष्ठा हुई । १२ मुनिसुव्रतजी का मंदिर-नाल यह गुरु मंदिर के परकोटे से बाहर है । मूलनायक सं० १६.८ में प्रतिष्ठित है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #18 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १६ ) ठहरने के स्थानों व यातायात संबंधी सूचनाएं (र्शनार्थ जानेका कम-कंदोईयों के बाजार से वासुपूज्य मंदिर की गली से सीधी सड़क भांडासरजी वहां से लौटती हुई सीधी सड़क से सुराणों की गुवाड़ होकर आचायों का चौक ) अंटियों, साथियों की गली होकर नाहटों की गवाड़ फिर बोरों की सेरी होकर रांगड़ी से कोचरों की गवाड़, वहां से बीदासर बारी होकर गंगाशहर रोड़, फिर गोगादरवाजा से बेगाणियां और कोठारियों की गवाड़ होकर रांगड़ी चौक में । (२) बीकानेर स्टेशन के सामने धर्मशाला मोहतों की है । यहां सर्व साधारण ठहर सकते हैं । (३) रांगड़ी के चौक में भी एक साधम शाला है जहां साधनों भाईयों के ठहरने का स्थान है | स्टेशन से तांगा, इक्का की सवारी सब जगह के लिए तैयार मिलती हैं । (४) पार्श्वचरंजी, रामलालजी की दादावाड़ी दूगड़ों की दादाबाड़ी, कोचरों की बोची, रेल दादाजी व नाटों की बगेची में भी बड़े यात्रियों के लिए ठहरने का स्थान है | (५) बीकानेर शहर के अलावा ये ग्रास पास की यात्रा बीकानेर पंच तीर्थी कहलाती है । (६) नाल के लिए बीकानेर रेलवे स्टेशन से लोरी जाती श्राती है। घोड़ा गाड़ी (तांगा इक्का) भी जाता है । बीकानेर स्टेशन से नाल को रेल गाड़ी भी जाती श्राती है पर स्टेशन से कुछ दूर रहता है इसलिए लोरी या तांगे में सुविधा रहती है। (७) उदरामसर गाँव के जाने माने के लिए भी रेलवे स्टेशन पर लोरियां खड़ी रहती हैं । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #19 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बीकानेर राज्य के जैन मंदिर बीकानेर के निकटवर्ती जैन मन्दिरों का परिचय देने के बाद राज्य के जैन मन्दिरों वाले ग्राम, नगरों की सूची दी जारही है १ बीकानेर दिल्ली रेल्वे लाइन पर (१) नापासर-शान्तिनाथ मन्दिर (२) दूंगरगढ़-पार्श्वनाथ मंदिर (३) बिगाशान्तिनाथ मन्दिर (४) राजलदेसर-आदिनाथ मन्दिर (५) रतनगढ़-आदिनाथ मंदिर और दादाबाड़ी (६) हापर स्टेशन से बीदासर बस सर्विम है - यहां च दाप्रभु देरासर है (७) सुजानगढ़ में पार्श्वनाथ, आदिनाथ मन्दिर द्वय और दो दादाबाड़ियां है (८) रतनगढ़ से सरदारशहर रेल जाती है, वहां दो पारसनाथ मन्दिर और दादावाडी है (6) चूरू में शान्तिनाथ मन्दिर और दादाबाड़ी है । (१०) राजगढ़ में सुपार्श्वनाथ मन्दिर (११) रिणी (तागनगर) राजगढ़ से बस सर्विस है यहां शीतलनाथजी का बीकानेर राज्य में सबसे पुराना सं० ६६६ का मन्दिर और एक दादाबाड़ी है (१२) नौहरराजगढ़ से हनुमानगढ़ जाने वाली रेल्वे लाइन में नोहर स्टेशन है । यहां पारसनाथजी का मन्दिर है और इसमें एक शिलापट्ट पर सं० १०८४ का शिला लेख है (१ ) मादरा-नोहर से २५ मील दूर रेल्वे स्टेशन है। यहां पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी की प्रतिमाएँ हैं। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #20 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ( १८ ) २ बीकानेर से भटिंडा लाइन पर (१) लूणकरनसर-सुपार्श्वनाथजी का मन्दिर और दादा गुरुचरण हैं । (२) कालू-लूणकरणसर, १२ मील से बस सर्विस है । यहां चन्दाप्रभुजी का मन्दिर और दादा गुरुचरण हैं । ३) गारबदेसर-कालू से कुछ दूर-इस गांव में मुरलीमनोहरजी के मन्दिर में एक जैन प्रतिमा है । (४) महाजन-चन्दाप्रभुजी का मन्दिर और गुरु चरण हैं । (५) सूरतगढ़-पार्श्वनाथजी का मन्दिर । (३) हनूमानगढ़-यहां किल्ले में मुनि सुत्रतस्वामी का मन्दिर है। ३ बीकानेर नागोर रेल्वे लाइन पर (१) देशनोक-स्टेशन के पास दादाबाड़ी और भूरों और आंचलियों के बास में शान्तिनाथजी और संभवनाथजी एवं लोंका उपाश्रय में केसरियानाथजी का मंदिर है । (२) नोखामंडी पार्श्वनाथजी का मन्दिर है । (३) पांच-देशनोक से २० मील, यहाँ पार्श्वनाथजी का मन्दिर है। ४ बीकानेर कोलायत रेल्वे लाइन पर (१) कोलायत से छः मील दूर भज्जू में बेगाणी और सेठियों के बास में नेमीनाथजी के दो मन्दिर हैं। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #21 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अभय जैन ग्रन्थमाला के महत्वपूर्ण प्रकाशन १. अभयर नसार (अपाय) २. पूजा संग्रह (अप्राप्य) ३. सती मृगावती ) ४. विधवा कर्तव्य |4) ५. स्नात्र पूजादि संग्रह (अप्राप्य) ६. जिनराजभक्ति आदर्श (अप्राप्य) ७. युगप्रधान जिनचंद्रसूरि (अप्राय) ८. ऐति. जैनकाव्यसंग्रह ५) प्रचारार्थ २।।) ६. सधपति सोमनी शाह ३) १०. दादा जिनकुशलमूरि, अप्राप्य ११. मणिधारी जिनचंद्रमरि (अप्राप्य) १२. युगप्रधान श्री जिनदत्तमूरि १) शीघ्र प्रकाशित होनेवाले ग्रन्थ १३. बीकानेर जन लेख संग्रह, सचित्र सजिल्द वृहद्अन्य मूल्य १०) १४. बान पार ग्रन्यावली पृ० सं० ४०० सचित्र सजिल्द मूल्य : २५. सम संदर ऋति कुसमांजलि सजिल्द पृ० ८ ० मूल्य ५) श्री मद्दवचंद्र ग्रन्थमाला ५. दाबीका वाशी जीवना सहन) प्रचारार्थ मूल्य 1) राजस्थानी साहित्य परिषद् के प्रकाशन १. जवानी, भाग १-२ मूल्य २) ३) ... राजस्थानी कहावता भाग १ --२ मूलप ३) ३, प्राप्ति स्थान - ५. नाहटा ब्रदर्स, ४ जगमोहन मल्लिक लेन, कलकत्ता-७ २. दानमल शंकरदान नाहटा, नाइटा गवाड़, बीकानेर भारतीय मद्रण मन्दिर, बीकानेर Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com Page #22 -------------------------------------------------------------------------- ________________ શવિ al Philo lehte Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com