Book Title: Vyavaharasutram evam Bruhatkalpsutram
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti

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Page 529
________________ से तणेनु वा तणपुंजेस वा पलालेस वा पलालपुंजेसु वा अप्पंडेम्स अप्पपाणेसु अप्पवीएमु अप्पहरिएमु अप्पुस्सेम अप्पुचिंग-पणग-दगमट्टिय-मक्कड़गसंताणगेसु अहे सवणमायाए नो कप्पइ निग्गंधाण वा निग्गंधीण वा तहप्पगारे उवस्सए हेमंतगिम्हासु वत्थए ॥३४॥ से तणेसु वा जाव-संताणएसु उप्पि सवणमायाए कप्पइ निग्गंथाण वा निगंथीण वा तहप्पगारे उवस्सए हेमंतगिम्हासु वत्थए ॥३५॥ से तणेसु वा जाव संताणएस अहे रयणिमुक्कमउडेसु नो कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंधीण वा तहप्पगारे उवस्सए वासावासं वत्थए ॥३६॥ से तणेस वा जाव संताणएसु वा उप्पि रयणिमुक्कमउडेसु कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा तहप्पगारे उवस्सए वासावासं वत्थए ॥३७॥ ॥ चउत्थो उद्देसो समत्तो ॥४॥

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