Book Title: Vyakhyapragnapti Sutra
Author(s): Abhaydevsuri
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 16
________________ व्याख्याप्रज्ञप्तिः अभयदेवीया वृत्तिः ॥२०८॥ PROCEROSAROKARANG जोयणसयसहस्साई आयामविक्खंभेणं एगा जोयणकोडी बायालीसं च जोयणसयसहस्साई तीसं च जोयणसहस्साइं दोन्नि य अउणापन्नजोयणसए किंचिविसेसाहिए परिक्खेवेणं, अत्थि पुण से अंते, कालओ णं सिद्धी २ शतके उद्देशः१ | न कयावि न आसि०, भावओ य जहा लोयस्स तहा भाणियब्वा, तत्थ दब्वओ सिद्धी सअंता खे० सिद्धी स्कन्दक सअंता का सिद्धी अणंता भावओ सिद्धी अणंता । जेवि य ते खंदया! जाव किं अणंते सिद्धे तं चेव जाव चरित्रं दब्वओ णं एगे सिद्धे सअंते, खे० सिद्धे असंखेजपएसिए असंखेजपदेसोगाढे, अत्थि पुण से अंते, कालओ णं मू०८९ सिद्धे सादीए अपज्जवसिए, नत्थि पुण से अंते, भा. सिद्धे अणंता णाणपजवा अणंता दंसणपज्जवा जाव अणंता अगुरुलहुयप०, नत्थि पुण से अंते, सेत्तं दव्वओ सिद्धे सअंते खेत्तओ सिद्धे सअंते का सिद्धे अणते भा०४ सिद्धे अणंते । जेवि य ते खंदया ! इमेयारूवे अन्भत्थिए चिंतिए जाव समुप्पजित्था-केण वा मरणेणं मरमाणे | जीवे वड्ढति वा हायति वा ?, तस्सवि य णं अयमढे-एवं खलु खंदया!-मम दुविहे मरणे पण्णत्ते, तंजहाबालमरणे य पंडियमरणे य, से किं तं बालमरणे, २ दुवालसविहे पं०, तं०-वलयमरणे वसहमरणे अंतोसल्लमरणे तन्भवमरणे गिरिपडणे तरुपडणे जलप्पवेसे जलणप्प. विसभक्खणे सत्थोवाडणे वेहाणसे गिद्धपट्रे. इच्चेतेणं खंदया! दुवालसविहेणं बालमरणेणं मरमाणे जीवे अणंतेहिं नेरइयभवग्गहणेहि अप्पाणं संजोएड, | तिरियमणुदेव. अणाइयं च णं अणवदग्गं दीहमद्धं चाउरंतसंसारकंतारं अणुपरियट्टइ, सेत्तं मरमाणे वड्ढइ २, २०८॥ सेत्तं बालमरणे । से किं तं पंडियमरणे, २ दुविहे प०, तं०-(ग्रं०१०००) पाओवगमणे य भत्तपच्चक्खाणे य।

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