Book Title: Udanam
Author(s): Jagdish Kashyap
Publisher: Uttam Bhikkhu

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Page 9
________________ उदानं [ ११३ (२-बोधि-सुत्तं १।२ ) एवं मे सुत्तं-एकं समयं भगवा उरुवेलायं विहरति नज्जा नेरञ्जराय तीरे बोधिरुक्खमूले पठमाभिसम्बुद्धो। तेन खो पन समयेन भगवा सत्ताहं एकपल्लङकेन निसिन्नो होति विमुखत्तिसुखं पटिसंवेदी । अथ खो भगवा तस्य सत्ताहस्स अच्चयेन तम्हा समाधिम्हा वुटुहित्वा रत्तिया मज्झिमं याम पटिच्चसमुप्पादं पटिलोमं साधुकं मनसाकासि इति-इमस्मि असति इदं न होति, इमस्स निरोधा इदं निरुज्झति यदिदंअविज्जानिरोधा सखारनिरोधो, सङखारनिरोधा विज्ञाणनिरोधो, विज्ञाणनिरोधा नामरूपनिरोधो, नामरूपनिरोधा सळायतननिरोधो, सळायतनिनिरोधा फस्सनिरोधो, फस्सनिरोधा वेदनानिरोधो, वेदनानिरोधा तण्हानिरोधो, तण्हानिरोधा उपादाननिरोधो, उपादाननिरोधा भवनिरोधो, भवनिरोधा जातिनिरोधो, जातिनिरोधा जरामरणसोकपरिदेवदुक्खदोमनस्सुपायासा निरुज्झन्ति । एवमेतस्स दुक्खक्खन्धस्स निरोधो होतीति । अथ खो भगवा एतं अत्थं विदित्वा तायं वेलायं इमं उदानं उदानेसि यदा हवे पातुभवन्ति धम्मा आतापिनो झायतो ब्राह्मणस्स। अथस्स कङखा वपयन्ति सब्बा यतो खयं पच्चयानं अवेदीति ॥२॥ ( ३–बोधि-सुत्तं १।३ ) एवं मे सुत्तं-एकं समयं भगवा उरुवेलायं विहरति नज्जा नेरञ्जराय तीरे बोधिरुक्खमूले पठमाभिसम्बुद्धो। तेन खो पन समयेन भगवा सत्ताहं एकपल्लड़केन निसिन्नो होति विमुत्तिसुखं पटिसंवेदी।। अथ खो भगवा तस्स सत्ताहस्स अच्चयेन तम्हा संमाधिम्हा वुटुहित्वा रत्तिया पच्छिमं यामं पटिच्चसमुप्पादं अनुलोमं पटिलोमं साधुकं मनसाकासि इति–इमस्मि सति इदं होति, इमस्सुप्पादा इदं उप्पज्जति; इमस्मिं असति इदं न होति, इमस्स निरोधा इदं निरुज्धति; यदिदंअविज्जापच्चय...(=१ सु०) दुक्खक्खन्धस्स समुदयो होति। अविज्जायत्वेव असेसविरागनिरोधा सङखारनिरोधो... (=१ सु०) दुक्खक्खन्धस्स २. महावग्ग, १११।३-५. ३. महावग्ग, १३१२६-७. I. सुखप्°-इति B. I. सुखप्-इति B. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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