Book Title: Udanam
Author(s): Jagdish Kashyap
Publisher: Uttam Bhikkhu
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२-मुचलिन्द-वग्गो
(११-मुचलिन्द-सुत्तं २।१) एवं मे सुतं-एकं समयं भगवा उरुवेलायं विहरति नज्जा नेरञ्जराय तीरे मुचलिन्दमूले पठमाभिसम्बुद्धो।
तेन खो पन समयेन भगवा सत्ताहं एकपल्लङकेन निसिन्नो होति विमुत्तिसुखं पटिसंवेदी । तेन खो पन समयेन महा अकालमेघो उदपादि, सत्ताहवद्दलिका सीतवाता' दुद्दिनी। अथ खो मुचलिन्दो नागराजा सकभवना निक्खमित्वा भगवतो कायं सत्तक्खत्तुं भोगेहि परिक्खिपित्वा उपरि मुद्धनि महन्तं फणं विहच्च अट्ठासि-मा भगवन्तं सीतं, मा भगवन्तं उण्हं, मा भगवन्तं डंसमकसवातातपसिरिसपसंफस्सो' ति । अथ खो भगवा तस्स सत्ताहस्स अच्चयेन तम्हा समाधिम्हा वुढासि । अथ खो मुचलिन्दो नागराजा विद्धं विगतवलाहकं देवं विदित्वा भगवतो काया भोगे विनिवेठेत्वा सकवण्णं पटिसंहरित्वा माणवकवणं अभिनिम्मिनित्वा भगवतो पुरतो अट्ठासि पञ्जलिको भगवन्तं नमस्समानो। अथ खो भगवा एतमत्थं विदित्वा तायं वेलायं इमं उदानं उदानेसि
सुखो विवेको तुटुस्स सुतधम्मस्स पस्सतो, अव्यापञ्झं सुखं लोके पाणभूतेसु संयमो। सुखा विरागता लोके कामानं समतिक्कमो, अस्मिमानस्स यो विनयो एतं वे परमं सुखन्ति ॥१॥
११. 1 द्रष्टव्यं महावग्गे, १॥३॥१-४ 2 A मुञ्च,° 3 A वट्ट, 4 C महावग्गे च--अ. 5 सरिसप. " एवमेव पठ्यते D. महावग्गे च; AB°ज्जं.
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