Book Title: Tirthankar 1978 11 12
Author(s): Nemichand Jain
Publisher: Hira Bhaiyya Prakashan Indore

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Page 2
________________ बन्दौ रे तोरथ नैनागिरि बन्देली लोकधुन पर आधारित एक वन्दना-गीत । कैलाश मड़बैया ऊँची-ऊँची बजर पहड़ियाँ, जिनपै हसे लतायें। पार्श्वनाथ के समोसरण पै, जैसे ध्वज फहरायें। बहे शीतल मन्द बयार बन्दौ रे तीरथ नैनागिरि ।। ऊपर मन्दिर, नीचे मन्दिर, मन-मन्दिर मे मन्दिर । नैना रहे निहार, नीक निर्मल नीरव नैनागिर। दये तन-मन-धन सब हार बन्दौ रे तीरथ नैनागिरि ।। मध्य सरोवर का जल-मन्दिर सचमुच नैनन भाये। क्षीरोदधि में जैसे जिनवर, स्वयं रथ लेकर आये। करे लहर - लहर जयकार बन्दौ रे तीरथ नैनागिरि ।। वरदतादि ऋषि जहाँ से, पाये मोक्ष दुआरे। घयों न रॉवर जाएँ दर्शन से बिगड़े भाव हमारे। नमो रे आ, रेशन्दीगिरि बन्दौ रे तीरथ नैनागिरि ।। चन्दा-सुरज, रैन-दिवस, जहाँ नित दीपक उजयारे। प्रकृतिनटी आ करे आरती, तीर्थकर के द्वारे। 517 74 Peta Privat Only बन्दौ रे तीरथ नैनागिरि। Jain Education International www.jainelibrary.org

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