Book Title: Tiloy Pannatti
Author(s): A N Upadhye
Publisher: Jaina Siddhanta Bhavana
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तिलोयपएणतो
गुणगारा पणणउदी एक्कासे देहि जत्तमेक्कसयं । सगसीतेदि (हि?) दुस्संति य धियदुसेया घणसहस्सा(?) ॥२४६॥ अडवीसं उणहत्तरि उणवण्णं प्रोवरि उवरिहाराय । घउचउवग्गं बारं अडदाल तिचउक्कचउवीसं ॥२४७॥ चादसभजिदा वि यदि हादि विदफल बाहिरुभयवाहूणं । लोउ पञ्चविहत्तदूसस्सम्भंतरोभयभुजाणं (१) ॥२४८॥ सत्ताई लहुबाहू तिगुणियलोभो य पंचतीसहिदो । विदफलं जवखेत्ते चोहसभजिदा हवे लोगो ॥२४६॥ एक्कस्सि गिरिविडए चउसीदी भाजिदो हवे लाओ। तं अट्ठतालपहदं विष्फलं तम्मि खेतम्मि ॥२५०॥ एवं अवियप्पा हेहिमलोउए। वण्णिदो एसो। एगिह उरिमलोयं अट्ठपयागे णिरुवेमो ॥२५॥ सामगणे विदफलं सत्तहिदो हाइ तिगुणिदा लोगा। बिदिए वेदभुजासे सेढी कोडीतिरज्जूश्रो ॥२५२॥ तदिए भुवि कोडीउ सेढी वेदा वि तिणि रज्जूउ । बहुजवमज्झे मुरयं जवमुरयं हादि तफ्खेतं ॥२५३॥ तम्मि जवे विदफलं लोगो सत्तेहि भाजिदा हादि । मुरयम्मि य विदफलं सहिदो दुर्गाणदो लोगो ॥२५४॥ घणफलमेक्कम्मि जवे अठ्ठावीसेहिं भाजिदा लोश्रो। तं बारसेहिं गुणिदं जवखेत्ते होदि विदफलं ॥२५५॥ तिहिदा दुगुणिदरज्जू तियभजिदा चउहिदा तिगुणरज्जू। एक्कत्तीसं च रज्जू वारसर्भाजदा हवांत उड्डुटुं ॥२५६॥ चउहिदतिगुणिदरज्जू तेवीसं ताउ बारपडिहप्ता । मंदरसरिसायारे उस्सेहो उड्खेत्तम्मि ॥२५॥ भट्ठाणवदिविहत्ता तिगुणा सेढी तदा ण विस्थाये। चउदत्त कारणखंडिदखेत्तेणं चूलिया हादि ॥२५८॥ तिणि तदा भूवासो ताण तिभागेण हादि मुहरु'दं । क्तचूलियए उदउ चउभजिदा तिगुणिदा रज्जू ॥२५॥ सत्तहाणे रज्जू उड्दुड एक्कवीसपविभत्तं ।
ठविदूण वासहेर्दू गुणगारं तेसु साहेमि ॥२६०॥ पिलो हेटिमलोओ य: 2 AB ओवरिम ; 3 AB चउदंत: but in 241 ABS च उतद

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