Book Title: Tiloy Pannatti
Author(s): A N Upadhye
Publisher: Jaina Siddhanta Bhavana
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तिलोयपएणती
- अहमपुढवोए हेडिमभागवादावरुद्धखेत्तघणफलं सत्तरज्जुश्रायदा एगरज्नुविक्खंभा सहिजोयणसहस्सवाहल्ला एसा अप्पणों बाहल्लं से सत्तभागवाहल्लजगपदर होदि ॥३०३६
एवं सव्वमेगं पमेलाविदे एप्तियं होदि
= १०६२००००
॥ एवं वादावरुद्धखेत्तघणफलं समत्तं ॥३०॥ संपहि अहहं पुढवीणं पत्तेक बिंदफलं धोरुच्चएण (१) वत्तहस्साम।।
तस्य पढमपुढवीए एगरज्जुविक्खंभा सत्तरज्जुदीहा वीससहस्सूणबेजोयणलक्खबाहल्ल एसा अप्पणो बाहलस्स सत्तमभागवाहल जगपदरं होदि ॥३०॥
विदियपुढवीए सत्तमभागूणबेरज्जूविक्खंभा सत्तरज्जुायदा बत्तीसजोयणसहस्सबाहल्ला सोलससहस्साहियवउण्हं लक्खाणमेगूणवंचासभागवाहल्लं जगपदरं होदि ॥३०६॥
-४१६०००
तदियपुढवीए बेसत्तमभागहीणतिरिणरज्जुविक्खंभा सत्तरज्जु प्रायदा अट्ठावीसजोयणसहस्सबाहल्ला बत्तीससहस्साहियपंचलक्खजोयणाणं एगुणवंचासभागवाहल जगपदरं होदि ॥३०७॥
-५३२०००
चउत्थपुढवीए तिण्णिसत्तमभागूणचत्तारिरज्जुविक्खंभा सत्तरज्जुमायदा चउवीसजोयणसहस्सवाहल्ला छजायणलक्खाणं एगूणवंचासभागबाहल जगपरं होदि ॥३०८॥
-६०००००
पंचमपुढवीए चत्तारिसत्तभागूणपंचरज्जुविक्खंभा सत्तरज्जुआयदा वीसजायणसहस्स. पाहल्ला वीससहस्साहिय छगणं लक्खाणमेगूणवंचासभागबाहल जगपदरं होदि ॥३०॥
I.s विद ।

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