Book Title: Tiloy Pannatti
Author(s): A N Upadhye
Publisher: Jaina Siddhanta Bhavana

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Page 28
________________ = १९९३३] = ३४३ । ६ तिलौयपण्णत्ती १६६ | = ३४३ । ८ ६५६ = ४ | ३४३ | १४४३४३।८ सत्तदिदुगुणलोगो विदफलं बाहिरुभयबाहाणं । पणभजिदुगुणं' लोगो दूसं (?) सम्भंतरोभयभुजाणं ॥२३३॥ तस्साई लहुबाहुं तम्गुणलोप्रो अ पाट्ठसहिदाउ । विदफलं जयखेत्ते लेोभो सन्ते वि पविते ॥२३४॥ तप्पणतीसंपदं सेटिघणं घणफलं च तम्मिस्सं । सहिदो होदि सद्धो चउगुणिदो लोयखिदि पदे (१) ॥२३५॥ सामण्णे बिंदफलं भुजकोडिसेटिवउरज्जूमो तज्जरवेदा (१) । बहुजवमज्मे मुखजवमुरयं होदि गियमेण ॥२३६॥ तम्मि जवे विंदफलं चोदसभजिदा य तियगुणो लोभो । मुरवमहीविदफलं चोदसमजिदा य पणगुणेो लोभो ॥२३७॥ घणफलमेक्कम जवे लोम्रो बादालभाजिदो होदि । तच्चवीसंपदं सप्तहिदो चउगुणो लोगो ॥२३८ ॥ रज्जूवो तेदालं बारसभागो तहेव सत्तगुणेो । ते लंभं (१) रज्जूओ. बारसभजिदा हवंति उड्दुडूं ॥२३६॥ हदबारसं सो दिवगुणिदा हवेद रज्जू य । मंदरसरिसायामे उच्छेश हेइ खेत्तम्मि ॥ २४० ॥ अट्ठावीसहिता सेढो मंदरसमम्मि तलवासे । चउतद (?) कारणखंडिदखे सेणं चूलिया होदि ॥ २४९ ॥ अट्ठावीसविहत्ता सेढी चूली य होदि मुहरुदं । ततिगुणं भूवासं सेढी बारसहिदा तदुच्छेदेो ॥ २४२ ॥ प्राणवदिविहतं सप्तट्ठाणेसु । ठविण बासहेढुं गुणगारं वत्तहस्सामि ॥२४३॥ डाउदी बाणउदी उणरावदी तह कमेण बासीदी। उणदाल बत्तीसं चोदस इय होंति गुणगारा ॥२४४ ॥ द्वाद रज्जुघणां सप्तट्ठाणेषु ठविय उड्दुड्ढे । ठविदूया वासहेतुं गुणगारं वत्तइस्सामि ॥२४५॥ 15 पणमत्ति 2 AB वत्तइज्मा (भा) मि । 得

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