Book Title: Sramana 1996 01
Author(s): Ashok Kumar Singh
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 92
________________ Opinions of the Visitors Who Visited the Vidyapeeth : ९१ tion of the books in the library is very useful, particularly for me. I hope the friendship of India and China will go longer. प्रो० शेर सिंह पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार पार्श्वनाथ विद्यापीठ देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और संस्थान के निदेशक से थोड़ी चर्चा हुई। निदेशक महोदय ने अपने प्रकाशनों का ब्योरा दिया तथा कुछ साहित्य भी। मैं आशा करता हूँ कि शोध का महत्त्वपूर्ण कार्य यह संस्थान कर रहा है। उसका आदर करते हुए भारत सरकार इसे विश्वद्यिालय का दर्जा देकर प्रोत्साहित करेगी। ओमप्रकाश अम्बाल जैन ( महानिदेशक ) १७-४-९५ ___एवं उषा अग्रवाल ( निदेशिका, प्रोग्राम ) भारतीय संरक्षण संस्थान, लखनऊ इस संस्थान में आकर और यहाँ का कार्य देखकर अति प्रसन्नता हुई। यहाँ के निदेशक तथा कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। बहुत अच्छा काम हुआ है और जैन साहित्य, जैन कला और जैन धर्म की बहुत बड़ी सेवा हो रही है। काम बहुत बड़ा और महत्त्वपूर्ण है। इस प्रकार के संस्थान देश में कम ही हैं और इसलिए भी इसका अधिक महत्त्व है। आशा है और अच्छा और उपयोगी काम होगा। मेरी शुभकामनाएँ संस्थान के साथ हैं। Pia. Kelohonker, Venla Varis 19th April 1995 Hameenlina College of Health Professions Finland Thank you very much for a short talk on basic ideas of Jainism. We will try to order our mind and not be angry for things that is past. Hira Lal 27 April 1995 New Delhi I am happy to have spent a couple of days at the Institute and meet Prof. Sagarmal Jain and other members of the faculty. I Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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