Book Title: Shastra Sandeshmala Part 23
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala

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Page 13
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ॥६०॥ ॥६१ ॥ ॥६२॥ ॥६३॥ ।। ६४॥ ॥६५॥ अट्ठारसपयडीणं अजहण्णो बंध चउविगप्पो य। साईअअधुवबंधो सेसतिगे होइ बोद्धव्वो उक्कोसाणुक्कोसो जहण्णमजहण्णगो य ठिइबंधो। साईअअधुवबंधो सेसाणं होइ पयडीणं सव्वासि पि ठिईओ सुभासुभाणं पि होंति असुभाओ। माणुसतिरिक्खदेवाउगं च मोत्तूण सेसाणं सव्वट्ठिईणमुक्कोसगो उ उक्कोससंकिलेसेणं । विवरीए उ जहण्णो आउगतिगवज्जसेसाणं सव्वुक्कोसठिईणं मिच्छादिट्ठी उ बंधओ भणिओ। आहारगतित्थयरं देवाउं वा विमुत्तूणं देवाउयं पमत्तो आहारगमप्पमत्तविरओ उ। तित्थयरं च मणुस्सो अविरयसम्मो समज्जेइ पण्णरसण्हं ठिइमुक्कोसं बंधंति मणुयतेरिच्छा। छण्हं सुरनेरइया ईसाणंता सुरा तिण्हं सेसाणं चउगइया ठिइमुक्कस्सं करेंति पगईणं । उक्कोससंकिलेसेण ईसिमहमज्झिमेणावि आहारगतित्थयरं नियट्टिअनियट्टि पुरिससंजलणं । बंधइ सुहुमसरागो सायजसुच्चावरणविग्धं छण्हमसण्णी कुणइ जहण्णठिई आउगाणमण्णयरो। सेसाणं पज्जत्तो बायरएगिदियविसुद्धो घाईणं अजहण्णोऽणुक्कोसो वेयणीयनामाणं । अजहण्णमणुक्कोसो गोए अणुभागबंधम्मि साई अणाई धुवअर्धवो य बन्धो उ मूलपयडीणं । सेसम्मि उ दुविगप्पो आउचउक्के वि दुविगप्पो ॥६६॥ ॥६७ ॥ ।। ६८॥ ॥ ६९ ॥ ॥ ७० ॥ ।। ७१ ॥ For Private And Personal Use Only

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