Book Title: Shadjivanikay Sutra Author(s): Swayambhava, Publisher: ZZZ Unknown View full book textPage 7
________________ २० दम्या धू वेगला काधी मठ मासिसक तथा सर्व जिοजी त्या इंडीयजे लि सारीरामानसी पावा नय पतपकरीना क्रमकरिब म मोटारचासर 50 5: कर करणी ककन २३ ऊदंता धुयामाहा जिइंदिया सच्चरक पदासाठ] पक्कमतिमादमिरणो। १३। ऽक्कराकरि ॐ महि तो दो दिला. जेयरासद् कन्केतलाईक ईदोघी. दे०देव के के लाकर सिया सन्तेसहाघमान लोकनविष देवताश्या ना० कम्मर जपावीन खकन बु०न १४ विनाका क त्राणेऽस्मदासाय कियादवाला ग कइ सिझेतिनारया।। २४। स्ववित्रापुचक सम संजम करीत. तपकरा मिमुक्तिमा ज्ञानदर्शन वारि ता बकाया राघणद्वार परि मधर्मस्वा १५ मु० मिजे नूतघया नई गुं |म्मा सजामातावणय समपन्ना ताणापरिनिचोड त्रिशब मि||१५|| | खुन्मोडा गाघाडी च्या चारनां ध्पयन श्रीजं संपूर्ण इतिवृत्ताय यांस सुधर्मस्वामिनंबूतिंकरबलगवेन ज्ञानवंत एम पूर्णः पूर्वत्राजित्र्यध्पयन ५२ अनावी बांडवोंक ह्यतियाचारतो कामनाद सुन्सान मे देाउया मयाख्यात्पुक या पालता होइन ध्मयनिक हिनि कुछ का धारक घाना माध्ययनात्रतासम्म ] | सुयामश्रासत्तियां लगवायाएव मरका य इ० एदशावकालिक सुनिविष नामनामा श्रन्श्रध्म सश्रमण स्वःनिश्व बजावली न तपस्वीई सगतज्ञा ममाहावीर देव काश प० को सा नवेनई नीरकरई श्रीयश मान्यपण बजावनिकाय इह खलु वणिया नामझयणं समागणं नगऩया मदानाारणं कासावiपावश्य सुन्तलीघर शलामा सुन्तलायुक्त सना मे कल्पानुं सएषुधकुंना स्वशिष्य दिशिष्यत्र्ागल इकमा तथा कारण मुक पालकाजी की एतिहरू स्वनिश्व निं वनारारूप इसा मुयरकाया सुयपन्नज्ञा सियाम हिडि धम्मपन्ना कश्रारखलुसा कायमी रकामे वाघवा [देनुइकरी परुपीमPage Navigation
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