Book Title: Shadjivanikay Sutra
Author(s): Swayambhava, 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 17
________________ काकरान तयाणांना नात्रा सचिनचनघणीवारलाटा नमचिनप्रघवी नसचिननववा निरापादि-नानासचिनन्छारंवार समादाइकरान। वायरज्ञाएकवार तासुनही नमघटाकरुन उपरऽप्रहारघा प्रघवाकायउपराएकवार नछाप्तारणाकरीलाराजाणुनही दायानडुनही यनांकनदीलाटीकटाउनही लागणवा नालिदिशा नावालदिशा नहिडा ननिदिका अन्ननलिदाविज्ञानवाला लारानकरावि०संघटोकरा, नातेदवडकरा अन्यन प्रालिलाटीका विविशेषघणा संघटोक सिंदखेड नमः नही नहारान देताना लाटाकाटनान स्नान करताना दाविका नघटाविज्ञानसिदाविना अनालिदितंवा विलिहिंतवा घहवा सिंदंतेवा नम सलजारपुनही जा जाबजावलगा ति विवीधरत्रावाघि मा मनश्क। वावच का काया न करूंनदा न करावुनहा रानकरी ईकरा मणुजाणझा जावावाए तिविद तिवाद मा वाया काराण नकारमिनकारावा क करता ऋन नकललुजाणुनहातधवाकायनापायलागुदाइ निकनड जि० देलू।गुरु अात्मा दोवा asa रेज्य यानिलिउ अात्मानाना नाशाकमका सरावे मकरतविश्रान्लनसमगुजारणामित्तस्ससातपडिनमामि निदामि गिरिदामि अप्पाणावासि @ सेन सि० माधुन निसाधवानई समयमस विना ५० श्रावती म पञ्चधारण पा० मायक मत दिदावन रारात्रिन एक हितत्तसयता न तपस्वी पापनावावा करी हमनविध विष नन रामिासमिरवा सिरकाणावा संजय चिश्य पडिय पचरकाय यावकाम्न दियावा राउवाए एकलाम यराघदामादि मन्सुतानी माग जागतानईअप चिपकायसमारनलिनुपादिहेमजामन् यरवेंक करदाप बहान बछाना डावंतन कायनादयापालन बेधकदकदि 363मा मनिया पाहिनिया a3उदयाप्रमुघ ख्या गउवा परिसागउवा मानवा जागरमाणिवासिउदगंवा उसेवा हिमेवा मादियवा करगंवा रान बेगलाघाउछु

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