Book Title: Shadjivanikay Sutra
Author(s): Swayambhava,
Publisher: ZZZ Unknown
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लसान लीन
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२याका स्तिका मु०सोल जा० जागा पापापनी बिजाणी सोफ यतिका ल्याएकी 도 फलपबइ प्रकार म व्यस्क ६ ४देम श्र० नि म६-२४ मस्तिकाय घं देस प्रदेयादिकन सालन न जाए
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साञ्चाजा श्यावगे उत्तये पिजाई सोच्चा जंमेयंत्तं समायारा राजाजा व विनयागोई जात न कम वेतवा जी०जा०ची० अजाण क5 किहांधा मो० ते शुरु जो जे कोई जाए । जी० जीवदानाचा वाराज १२ घी बकायनाने विजाइ धनादिपरिणाविवस्वासमा पेश्शदस १२ चनयाणे जाचा जाच यात्तो कद सोनादा सेजमा २] जाजााच विविया गई गंजा विविविया
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शिवप्रभुना
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समचरमस
जनता जमनुष्य
जनजे निनिवर्त्तनो देवतासंबंधी तथा जे स्वान प्रमुघ संबंधी नित्य २६ नारि बीड नई जमनुष्यना इतालीसालद
तति चन्द्रां सं० योग सत्यंतर क्रोधादिवि बारिश 35 परिग्रहनि बाबाहिर नाधना नजे साधुजी दिक विलक विपरीतल
जाणी
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अस्थावेदना मिध्याच कषाय जसकर्म एकैडा जातिमुष ८२ रुपयापन जाएाई सामान जिवार 59न्पायनउरुडउवाले कहिल ज्ञानद१४५म पदावर तिवारि न नमक एबिन्द इजालाइ । वे मुक हाय । जान कर्म से जोगरूप सिह जीवति हो कर्म एबं च कारिका इकरा कमनवेदन निकाय गोत्री कायानयोग करी। पांचवीस किरीया कशा जाप कर्म बोध मालामने इसे बंधक हो जइ । जे जीवना कर्मनिविजोग रूप नमो नलेद सत्यरूप ।। ६२२ श्रम धर्मास्विकाय
करना काला नाकरी की दस्तार20
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जति पु० पा०यायन बबंध मुमो ज०जाए तति निःनिव २५ वारिं न्नई इ
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राजीव धव जीवनाद१४
कमाए कैंडी नाद सुकार अनि बदिर २

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