Book Title: Samaysar
Author(s): Kundkundacharya, 
Publisher: Bharat Varshiya Varni Jain Sahitya Prakashan Mandir

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Page 669
________________ समयसार वंतमप्यन्यं समन्वज्ञासं मनसा च वाचा च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ।। १२ । यदहमचीकर यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं मनसा च वाचा च तन्मिथ्या में दुष्कृतमिति ॥ १३ ॥ यदहमकार्ष यदचीकर मनसा च कायेन च तन्मिथ्या मे दुधात भिति । हाल यजुर्वनामन्यं समन्वज्ञास मनसा च कायेन च तन्मिथ्या में दुष्कृतमिति ।।१५।। यदहमचीकरं यत्कुर्वतमप्यन्य समन्वज्ञासं मनसा च कायेन च तन्मिथ्या में दुष्कृतमिति ।।१६।। यदमकार्ष यदचोकर वाचा च कायेन च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ।।१७।। यदहमका यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं वाचा च कायेन च तमिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥१८॥ यदहमचीकरं यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं वाचा च कायेन च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥ १६ ॥ यदहमकार्षं यदचोकर मनमा च तन्मिध्या मे दुष्कृतमिति ॥ २०॥ यदहमकार्ष यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं मनसा च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥ २१॥ यदहमचीकरं यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं मनसा च तस्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥२२॥ यदहमकार्ष यदचोकरं वाचा व तन्मिथ्या में दुष्कृतमिति ॥२३।। यदहमका यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं वाचा च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥२४1। यदमचीकरं यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं वाचा त्र तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ॥२५॥ यदहमकार्ष यदचोकरं कायेन च तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति ।।२६॥ यदहमकार्ष यत्कुर्वतमप्यन्यं समन्वज्ञासं कायेन च तन्मिथ्या हव सत्तायां । प्रातिपदिक -वैदयमान, कर्मफल, आत्मन्, यत्, तु, कर्मफल, तत्, तत्, पुनर, बीज, दुःख, कायसे किया तथा अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥१५।। जो मैंने मनसे तथा कायसे कराया और अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत्त मिथ्या हो ।।१६।। जो मैंने वचनसे तथा कायसे किया और कराया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ।।१७।। जो मैने वचनसे तथा कायसे किया तथा अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥१८॥ जो मैंने वचनसे तथा कायसे कराया तथा अन्य करते हुएका मनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ।।१६।। जो मैंने मनसे किया और कराया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥२०॥ जो मैंने मनसे किया तथा अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ।।२१। जो मैंने मनसे कराया और अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ।।२२।। जो मैंने बचनसे किया और कराया वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥२३।। जो मैंने वचनसे किया और अन्य करते हुएका अनुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥२४॥ जो मैंने वचनसे कराया और अन्य करते हुएका अनुमोदन किया वह मेरा,दुष्कृत मिथ्या हो ॥२१॥ जो मैने कायसे किया और कराया तथा अन्य करते हुएका कुमोदन किया, वह मेरा दुष्कृत मिथ्या हो ॥२६॥ जो मैंने कायसे किया और अन्य करते

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