Book Title: Pratima Shatak Granth
Author(s): Pratapvijay, 
Publisher: Muktikamal Jain Mohan Mala

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Page 4
________________ NEEEEEEEEEEOE099999 - धन्यावादार्पणम् -- शेठ अमृतलाल (अमथालाल) मानचंद. शंखलपुर. लगभग आजथी अढी वर्ष पहेला, ज्यारथी पूज्य अनुयोगाचार्य (पं.) श्री मोहनविजयजी सद्गुरुनो आपने सद्योग मळ्यो त्यारथी पोताना आत्मकल्याण तरफ वधु प्रगति आदरी, तन मनथी प्रशस्त अभिग्रहो ग्रहण करी दृढ रीते पाळो, छो, तेमज धननो पण सत्क्षेत्रमा सव्यय करता रहो छो. आ माळाने पग आर्थिकरीत्या पहेलुं प्रोत्साहन आपनार आप छो, जेने लीधे पुष्प ६९ अने आ महान् ग्रंथ प्रकट थई अनेकने लाभदायी नीवड्या छे; अने हजु पण ते (स्वःश्रेयः)तरफ आपनी प्रवृत्ति चालु छे, तेथी आकर्षाइ आपने धन्यवाद आपी अमो संतोष मानीए छीए. श्रीमन् मुक्तिकमल जैनमोहनमालाना कार्यवाहको.

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