Book Title: Pratima Shatak Granth
Author(s): Pratapvijay, 
Publisher: Muktikamal Jain Mohan Mala

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Page 18
________________ किश्चित् भावितरश्मिस्तोकायत्यापादिताचार्यकार्यन्यायाचार्यविहारमध्यमेदिनीमार्तण्डास्ताचलारोहसमयः वि.१७४५ दर्भावती (डभोई) प्रास्ता नगर्यामिति-जननयनविषय तत्कालप्रतिष्ठितपूज्यपादुकोल्लेखोपि वोभूयतेधुना ॥ अयमेव तल्लेखःविकम्।। ॥१४॥ संवत् १७४५ शा. १६१० मागशीर्ष शुक्ल एकादशी ॥ श्रीहीरविजय सूरीश्वर शिष्य पं. श्रीकल्याणविजयगणि शिष्य पं. श्रीलामविजयगणि शिष्य पं. जीतविजयगणि सोदरा सती• पं. श्रीनयविजयगणि शिष्य श्रीजशविजयगणिनां पादुका कारापिता ॥ एवंच-श्रीमज्जन्म-१६५०-५७, स्वाराज्यारोहश्च १७४५, ततस्सर्वायु:-८८-९५ । इति. शिष्यपरिकरः हन्त, निश्चिक्युः केचन श्रीमताम् धुरन्धरविद्यावीराचार्योद्घानाम् शिष्यसन्तानाभावं सत्यपिशिष्यसन्तानेप्रज्ञाप्रकर्षाभावं वा, समासाद्यभूयसायासेन विनेयश्रेणि के नारोक्ष्यन्ते आनन्दनिश्रेणि?; सोयम् ॥१४॥

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