Book Title: Pajjunnchariu
Author(s): Sinh Mahakavi, Vidyavati Jain
Publisher: Bharatiya Gyanpith

View full book text
Previous | Next

Page 483
________________ 350] विशिष्ट शब्दों की शब्दानुक्रमणिका ( अकारादि क्रम से ) ध्यातव्य क्रमांकों के सन्दर्भों में प्रथम अंक सन्धि सूचक, दूसरा अंक उसके कड़वक छन्द का सूचक तथा तीसरा अंक उस कड़वक की पंक्ति संख्या का सूचक है। अइआरु अलुंग अनिठुर अइरीणा अउज्क्षहिं अगद अंगुलीज अंगुव्भव अंचल अंजण अंजिय अंतावलि अंतिभुविलासु अंतेजर अधिवंस अंज अंवरु अंसु अक्खड़ अक्खउ अक्रिलज्ज अक्स्त्रीण अंजन 15/12/2 आँजना 3/2/10 अंतड़ियाँ 2/18/11 ( तप कल्याणक ) 15/10/7 अन्त:पुर 1/13/5 अन्धिकवृष्टि वंश 14 / 17/8 आम्र 3/7:5 अम्बर (आकाश) 8/3/2 वस्त्र 3/8/2 अकियजिणेसर- अकृत्रिमजिनेश्वर 14/9/9 अक्षत चावल 3/3/1 अक्षत 6/11/7 कहना 15/25/13 अक्षीण 15/23/25 अक्ष- जुआ अर्थात् चौपड़ 15/3/13 अगहन मास 9/9/8 अक्खूच अग्गहण अग्गहारु अग्निभूइ अग्गिल अग्धु अचल अच्चुव - - अत्यन्त क्रोधित 12/3/10 अत्यन्त उत्तंग 3/12/3 अतिनिष्ठुर 15/24/20 अत्यन्त दुखी 15/09/8 अयोध्या नगरी 5/11/5 - गया नामका अस्त्र 8/11/5 मुद्रिका 11/2/9 प्रद्युम्न 15/8:2 आँचल 2/15/1 महाकर सिंह विरउ पज्जुपणपरि अग्निहोत्री, अग्नि में होम देने वाले 4/14/12 अग्निभूति नामक व्यक्ति 4/14/14 अरिगला नामकी स्त्री 4:14/13 अर्थ 2/10/9 पर्वत 4/9/14 अच्युत स्वर्ग 7/7/10 अच्चुवकप्प अच्चेव अच्छइ " च्छोर अछमि अजिंमण अजिय अज्जण अज्जुणवण अट्ठ अट्ठ अट्ठ अठ्ठाहिय अडई अडसय अडूरो अनंत अणहंत अणियलि अणिरुद्ध अणिलाएवि अणुद्धरि अणुवमु अणुब्वय अणुहुँ - - - - - - - स्वर्ग 9:11/8 - अच्युत अर्चना 15/8/8 है 4/12/2 अक्षोह, सेन्ा 3:2:5 कहना 10/18/7 उपवास 9/1518 अजितनाथ तीर्थंकर 15:6/6 अण्णमणा अद्धक्किय अद्धचंद अक्स अद्धमियंक अर्धचन्द्र 4/5/11 अद्धवरि अर्जुन नामका पाण्डव 13/5/11 अर्जुनवन 8/14/11 आउ 12/10/9 आठ मूलगुप् 5/10/3 आठ 9/11/13 अठाई पर्व, अष्टान्हिका पर्व 15/5/9 चला 15/8/2 अडसठ 15/12/5 एक वाद्य 2/1/2 अनन्तनाथ तीर्थकर 15/6/16 अरहंत परमेष्ठि 2/12/2 अनिवृत्तिकरण गुणप्रधान 15/24/9 अनिरुद्ध नामका पुत्र 15/21/12 अणिलादेवी गामकी महिला 8/13 अनुद्धरि नामक स्त्री 14/9/9 अनुपम 9/2/10 अणुव्रत 6/1/6 अनुभव 14/11/2 अनमना 11/11/5 अर्धकृत अधूरा 12/26/5 कृष्णः | 3/3/4 अर्ध चक्रेश अर्थात् कृष्ण 3/3/4 अधावर्ग, आधा तेला 15:3/4

Loading...

Page Navigation
1 ... 481 482 483 484 485 486 487 488 489 490 491 492 493 494 495 496 497 498 499 500 501 502 503 504 505 506 507 508 509 510 511 512