Book Title: Nyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 7
________________ या सजा तरफथी प्रगट थता ग्रंथमां जुदा जुदा गृहस्थो तरफथी प्रव्य संबंधी सहायो आपवामां श्रावी े ते पैकी श्र ग्रंथमालानी ५०० नकलो प्रगट करवा माटे तमाम खर्च श्री जावनगर निवासी गृहस्थ शा श्राणंदजी पुरुषोत्तमदास तरफथी आपवामां आवेल बे. ते संबंधमां पण उपदेशादिनो प्रयास सदरहु पन्यासजी महाराजेज करेलो बे. ग्रंथमाळामां श्रीमद्यशोविजयजी उपाध्यायविरचित अनेक ग्रंथोंपैकी दश ग्रंथो प्रगट करवामां श्राव्या बे. तेमां प्रथम आपला अध्यात्मसार नामना ग्रंथ उपर हालमां पन्यासजी श्रीगंजीरविजयजी महाराजे सुमारे १००० श्लोक प्रमाण टीका रची बे, ते शिवाय बीजी कोइ टीका नथी. चोथो ग्रंथ आध्यात्मिक मतपरीक्षा नामनो स्वोपज्ञ टीका सहित आपेलो बे तेनुं बीजुं नाम आध्यात्मिकमतखंरुन बे. एमां केवळीने कवळाहार न होय एवी दिगंबरीनी मान्यतानुं खंकन बे. आज नामनो आज कर्त्तानो करेलो बीजो मोटो ग्रंथ बे तेनापर पण तेमणेज पोते टीका करेली बे. तेनी अंदर दिगंबरोनी केवळी संबंधी बीजी पण मान्यता विगेरेनुं खंरुन बे. आठमो ग्रंथ नयोपदेश नामनो अवचूरि सहित आपलो बे, ते अवचूरि श्री जावप्रसूरिनी बनावेली े. या ग्रंथ उपर एमणे पोतेज नयामृततरंगिणी नामनी विस्तारवाळी टीका रची बे, तेना उपरथीज संदेपमां या अवचूरि बनाववामां श्रावी बे. या त्रण ग्रंथो शिवाय वाकीना सात ग्रंथो उपर टीका के अवचूरि कांइ पण बनेल जाणवामां नथी. या दश ग्रंथोमां पांचमो ग्रंथ य तिलक्षण समुच्चय नामनो आपेलो वे ते मागधी गाथाबंध बे. बाकीना नव ग्रंथो संस्कृत बे. तेमां पण अध्यात्मसार, अध्यात्मोपनिषद्, आध्यात्मिकमत

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