Book Title: Nyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 5
________________ बनाववाने ते शक्तिमान अया जे. एमनी शक्तिनो श्रनुजव करनारा श्रआधुनिक विधानो एमने अपूर्व शक्ति धारण करनारा माने ने अने ते अक्षरशः सत्य ने. | आवा उत्तम महापुरुषनुं जन्मचरित्र आपq ते खास आवस्यकतावाळु कार्य के परंतु ते श्रेणिबंध उपलब्ध अत्तुं व होवाथी जे प्रकारचें उपलब्ध अश् शक्यु ने ते प्रकारे श्रा प्रस्तावनाने अंत आपवामां आव्यु बे. आवा महापुरुषोना ग्रंथो प्रकाशमां लाववाथी जैनशासननी अपूर्व प्रजानो अन्य मतवाळाऊने पण नास थ शके जे. आ सजाए ए कार्य बहु वर्षथी हाथ धर्यु जे. ते खाते महान् उपगार श्रीमन्मुनिराज महाराज श्रीवृधिचंदजीनो बे. ते साहेबनी खास प्रेरणाश्री प्रथमं कळिकाळसर्वज्ञ श्री हेमचंाचार्यजीनी कृति बहार पासवानी धारणा अमलमां मुकीने ते , महात्मानुं करेलु श्रीत्रिषष्टिशलाका पुरुष चरित्र बहार पामवानुं शरु कर्यु. हालमां ते महाग्रंथ संपूर्ण श्रवा आव्यो बे.y दरम्यानमा तेश्रो साहेबनो करेलो अनिधानचिंतामणि ग्रंथ अवचूरि तेमज शब्दोना अक्षरानुक्रम साथे बहार पाड्यो ने तेमज ते साहेबनीज प्रसादी तरीके श्रीविनयविजयजी उपाध्याये बनावेलुं लघु हैमप्रक्रिया व्याकरण बहार पाड्यु ने हालमां श्रीहरिजन सूरि महाराज अने श्रीसिद्धसेन दीवाकरजीनी कृति तरीके तेमना करेला त्रण त्रण ग्रंथोनी ग्रंथमाळा बहार पामीने अने उमास्वाती वाचक महाराजाने पण नूली जवामां श्राव्या नथी. ए साहेबनी उत्तम कृतिवालो प्रशमरति ग्रंथ अवचूरि तथा टीका सहित उपाववा माटे तैयार करवामां श्रावे . ' १ श्रीसिद्धसेन दीवाकरजीकृत ग्रंथमाळा थोडा वखतमा बहार पडनार छे. छपाय छे.

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