Book Title: Nyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha
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जापाना श्रन्यासी माटे वीरस्तुतिरूप दंगीन स्तवन (१५० गाथार्नु) बनाव्यु हतुं तेना उपर श्रीपद्मविजयजी महाराजे घणाज विस्तारथी बाळावबोध करेलो ने अने ते श्रीप्रकरणरत्नाकर जाग त्रीजामा उपायेल पण वे. । ढुंढकोनी प्रबळता साथे ए समयमा क्रियामार्गमा शिथिळ थयेला यतिनी संख्या अने प्रबळता पण विशेष जणाय के. एजे साहेबना दिखमा आथी बहुज खेद अयो जणाय ने अने तेथीज श्रीसीमंधर स्वामीनी स्तुतिरूप सवासो गाथार्नु स्तवन बनावीने तेमणे पोताना हृदयनो उत्जरो बहार काढ्यो बे. सामात्रणसें गाथाना स्तवननो टबो श्रीज्ञानविमळसूरिए तेमज श्रीपद्मविजयजी महाराजे बंनेए पुरेलो . ते पैकी श्रीपद्मविजयजीवाळा टवा सहित ए स्तवन उपायेलुं . सवासो गाथा- स्तवन पण अर्थ सहित उपायेल जे. शुध मार्गना खपीने माटे ए स्तवन बहु वांचवा लायक . | श्रीसत्यविजयजी पन्यासनी साथे एजे साहेबे पण क्रियानमार करेलो जणाय .. यतिनो समुदाय अने ढुंढक मतवाळा एमनापर एटला बधा अंतरष धरावनारा हता के तेले कोइ पण प्रकारे तेमना महत्वनी वृद्धि जोश शकता नहोता. एमने मात्र बसें वर्ष थयों वतां एजे साहेबना करेला संख्याबंध ग्रंथोमांथी बहु जुज ग्रंथोज हस्तगत थाय ने तेनुं कारण पण एमनो क्षेषज जणाय बे.
अध्यात्मरसना रसीया श्रीआनंदघनजी महाराज तेमना समकालीन हता एटलुंज नहीं पण तेमनाथी उपाध्यायजीने अध्यात्म संबंधी केटलोक लान पण मळ्यो हतो एम जणाय ने अने तेथीज तेमनी कृति तरीके गणाती श्रीआनंदघनजीनी स्तुतिरूप अष्टपदी ते साहेबे रची हशे एम जणाय जे. श्राने माटे विशेष खात्रीलायक हकीकत मळी शकती नथी.

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