Book Title: Nishesh Siddhant Vichar Paryay
Author(s): Labhsagar
Publisher: Jainanand Pustakalay

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Page 134
________________ निशीथचूर्णिपर्यायाः 'अपनवओ' अशक्तस्य / 'तिक्खसंहिणधारं' ति, तीक्ष्णश्लक्ष्णधारं / 'चन्द्रार्द्ध' इति पादयोः / 'सुक तुंडे' इति हस्तयो: / पोमेगवां रोमे। 'पउमे' कुसुंभकिट्टिकायां / 'मंसूचिबुगे' श्मश्रूयुते ओष्ठे / 'उत्तरमाणो अच्छी रेणू वा अकारो ज्ञेयः / 'संजश न तडफडेज' इति नकारोऽयं / 'सीयाणं' मशानं / गिरिवडे छप्परे / 'मुत्तसकराए य' ककराभिर्युतं सुन्न / 'महासद्दिया'-गईभी / 'विसुवावेइ वा इति उववेइ इति भणियं होइ / 'तत्थेव उत्तति, पीठोक्तमय / खारतेलं-तिलतैलं / खाडाहडो-पिण्डिकारूप: / 'जमि जोगे तणा' नियन्त्रणा / 'तकाइ एगंगियं' आयंबिलं / 'पणिय विलेवी' जाउलिया। 'पच्चक्खाणे' ति, संवरणं / 'थूलं भे' बहुलाभे। 'तस्य पूर्व न भवतीत्यर्थ' इति प्रवेश इत्यध्याहारः / 'पहाणिया सोहगा' वेढा सोहगा' पदकरा-चर्मकरा:। 'निलेवा'रजकाः। अन्नत्थ अजुंगिया' अकारो ज्ञेयः / 'मोरुत्तिया' यध्रियककारिणः / 'सिग्गा' श्रान्ता / 'जावसिया' चारिवाहका: / 'मोयगमाइयं' ति कदली। ‘एवं आसाहपिच्छे' ति, हरितं / कडपूरेण उदरपूरण। हिंगुदद्दरिय-हिंगुमिस्साई डरी। 'उल्लोएण' सामान्येन। 'अप्पायणट्ठा' स्फाईओप्यायी आप्यायनाय / 'नेकतिओ" नित्यपिण्डः। 'समिइमा' मण्डका: / 'भत्तट्टस्स अवढई' भक्ताद्धमित्यर्थ: / एक दिजा शावेत / 'विवकराइदोसा' विपत्करा दोषा: / ससवत्तियं-ससऊकं इत्यर्थः / डिडिमहेउगर्भहेतुः / 'पम्हुट्टाइयाण भायणं' समर्पणं / अहिगरणं-भण्डी / 'संजमसारं ठवेउ' संथिलीकृत्य / 'वसहीए पुरोहडे' पच्छा / गणिणीमहत्तरा / अभीजा-अयोग्या। 'पात्तीएंतेण पोती'-चिलिमिलिसमीपेन / 'एवं सब्वेसु' पुत्तशब्दो योज्यः / इमं चिन्तन्ति संयत्यः / 'पन्नप्पइ'नीरोगी करोति। किरियासज्झाए-क्रियासाध्याया: / समोसियगोप्रातिवेशिकः / 'गोवालकंचुको' गायत्री / जो ओतो-यत् ओजः

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