Book Title: Jiva Ajiva
Author(s): Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 162
________________ १५३ (क) इन्द्रिय के चार भेदों का नामोल्लेख करते हुये उनका आधार बताइए। (ख) प्राण और पर्याप्ति का अन्तर स्पष्ट कीजिये । (ग) शरीर, स्पर्शनेन्द्रिय, कायबल और काययोग में क्या अंतर है? (घ) प्रकाश-अंधकार को पौद्गलिक कहने का क्या कारण है? (ड) आधार कितने पदार्थ हैं, और आधेय कितने? (च) छः लेश्याओं के लक्षण बताइये।। ४. किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर दीजिये-- (क) पर्याप्तियों का नामोल्लेख करते हुये उनकी परिभाषा सविवेचन समझाइये । (ख) कर्म की परिभाषा स्पष्ट करते हये उनके कार्यों का विवेचन कीजिये। (ग) जैन दर्शन में कार्य की उत्पत्ति के लिये माने गये कारणों को सोदाहरण समझाइये । (घ) 'शुभयोग' आश्रव क्यों है? (ड) “काल द्रव्य अस्तिकाय नहीं है, वह वास्तविक द्रव्य नहीं, काल्पनिक है"-- इसे सिद्ध करते हुये काल की उपयोगिता स्पष्ट कीजिये । (च) कर्म-बंध की प्रक्रिया को समझाते हुए बंध और पुण्य-पाप का अंतर स्पष्ट कीजिये । (छ) आत्मा और जीव का विवेचन करते हुए आत्मा के अस्तित्व पर अपने विचार प्रकट करें । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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