Book Title: Gommat Prashnottar Chintamani
Author(s): Digambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
Publisher: Digambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti

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Page 1119
________________ अध्याय : ग्यारहवां [ १०२६ करुणा करके उसका अज्ञान दूर नहीं किया जायेगा वह दुर्गति का पात्र बन जायेगा। तुमने जो अनेकान्तवादी को दोष लगाया यह तुम्हारा दोष नहीं है तुम्हारी प्रज्ञता का द्योतक सार्थक शब्द है । स्यात् शुरद संशयात्मक, भ्रम जलक, शायद, सम्भव प्रादि का सुचक नहीं है । किन्तु "सर्वथात्वनिषेधकोऽनेकान्तता द्योतकः कथञ्चिदर्थे स्थाच्छन्दो निपातः"-स्थात् शब्द निपात है। वह सर्वथापने का निषेधक अनेकान्तपने का द्योतक, कथञ्चित अर्थ वाला है। मैं तुम लोगों के प्रति दया करके भाग्य एवं पुरुषार्थ के यथार्थ स्वरूप का वर्णन के पहले तुम लोगों के वचन क्यों मिथ्या है ? यह बता देता हूं, क्योंकि "विन जाने ते दोष गुरगन को कैसे तजिये गहिये" । सच्छंददिद्विहि वियपियारिण तेष्टि जुत्तारिण सयाणि सिणि। . पाखंडिणं वाउल कारणारिस अण्णणिबिसारिण हरंति ताणि ॥२१७४॥ आप लोगों का श्रद्धान अर्थात् विश्वास वृषभ जैसे स्वछन्द अर्थात् अपने मनमाना है जो कि पाखंडी जीवों को व्याकुलता उत्पन्न करने वाला और अज्ञानी जीवों के चित्त को हरने वाला है । पर समयारणं वयण मिच्छं खलु होइ सम्बहा वयणा । जेणारणं पूर्ण वयरणं सम्मं न कहंधिव मरणादो १३२१७५।. तुम लोगों के वचन 'सर्वथा कहने से नियम से असत्य होते हैं और जैन मत के वचन 'कथंचित्' बोलने से सत्य हैं। क्योंकि वह अनन्त धर्मस्वरूप वस्तु को 'कथञ्चित् वचन कहता है, इससे सत्य है । बयोंकि एक वचन से वस्तु का एक धर्म ही कहा जाता है। यदि कोई सर्वथा कहे कि वस्त का स्वरूप है तो बाकी के धर्मों के प्रभाव को प्रसंग होने से वह भी झूठा कहलायेगा ! इस प्रकार एकान्त में दोष है अनेकान्त में गुण हैं भाग्य एवं पुरुषार्थ की स्थाद्वाद नीति से समबन्य--- अबुद्धि पूर्वापेक्षायामिष्टानिष्टं , स्वदेवतः ।। बुद्धि पूर्वव्यपेक्षाया मिष्टानिष्ट स्वपौरुषात् ।।२१७६॥ अन्वय----अबुद्धि पूर्वा पेक्षायां इष्टानिष्टं स्वदेवतः, बुद्धि पूर्व व्यपेक्षाया इप्टानिष्ट स्वपौरुषात् भवति । अबुद्धि पूर्वक हुए कार्य की अपेक्षा से इष्ट अनिष्ट कार्य अपने देव से हुए हैं । ऐसा माना जाता है, तथा जो कार्य बुद्धि पूर्वक किये जाते हैं, उस अपेक्षा से इष्ट और । अनिष्ट कार्य अपने पुरुषार्थ से हुए हैं ऐसा माना जाता है। - PRASidarisist

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