Book Title: Dhamil Charitra Bhashantar Part 04
Author(s): Shravak Hiralal Hansraj
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 200
________________ धाम्म स श्रीनानिनरेंद्रनंदनजिनः श्रेयांसि देयाचिरं / यः स्थाना त्रिजगत्पराजवकरं नृपं जिगाय स्मरं // स्कंधबंदनिलीनकुंतलततिव्याजेन वर्यादर-न्यासं वैरिजयप्रशस्तिरमला तेनैव किं लि ख्यते // 1 // श्रीसिघार्थनरेंद्रवंशतिलकः श्रीवर्धमानो जिन-स्तत्पट्टे किल पंचमो गणधरः स्वा. 751 | मी सुधर्मा ततः // श्रीजंबूप्रनवादयो गणभृतस्तेषां क्रमेणागतः ! श्रीषानंचलगढ एष विजयी.वि. श्वे चिरं नंदतात् // 2 // तत्रार्यरक्षितगुरुर्जयसिंहमूरिः / श्रीधर्मघोषगुरवोऽथ महेंद्रसिंहाः // सिंह... जेणे पोताना बळथी त्रणे जगतने परानव करनारा कामदेवरूपी राजाने जीतेलो ने, अने तेथीज जाणे बन्ने खनापर लटकती केशोनी श्रेणिना मिषयी उत्तम अदरनी स्थापनावाळी वै. रिने जीतवाथी निर्मल जयप्रशस्ति शुं लखी होय नहि, एवा ते श्रीनान्निराजाना पुत्र प्रथम जि. नेश्वर चिरकालसुधी कल्याण थापो? // 1 // श्रीसिद्यार्थराजाना वंशमां तिलकसमान श्रीवर्धमान जिनेश्वर थया, तेमनी पाटे पांचमा गणधर श्रीसुधर्मास्वामी थया, त्यारबाद श्रीजंबूस्वामी तथा प्र. नवस्वामी आदिक गणधरो थया, अने तेजना अनुक्रमथी थावेलो था विजयवाळो अंचलगढ जगतमां चिरकालसुधी समृछि पामो? // 2 // ते अंचलगबमां श्रीयार्यरदितसूरि, जयसिंहमूरि, P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust

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