Book Title: Anusandhan 2008 12 SrNo 46
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 40
________________ डिसेम्बर २००८ ऊंधाधलउं = ऊंधांधळं झांखुं, चूंखडुं, चंचळु, मंद दृष्टिवाळु [ उद्वलिकम् ] सूगामणउं = सूग उपजावनाएं, घृणास्पद (सं. 'शूक' परथी.) [सूकाजनकम् ] अहिवा विधवा (सं. अधवा) [ अविधवा ] सूहव = सौभाग्यवती, संधवा स्त्री (सं. सुधवा) उत्तरिण्यु = ऋणमुक्त (हिं. उतरिन) पढू = जामीनगीरी आपनार, जामीन, जामीनदार (सं. प्रतिभूः > पडहू > पदू) पडूचउं = जामीनगीरीमां मूकेली वस्तु ऊपरियामणउं उल्यु = ओल्युं, पेलुं पयलउ = पेलो, पेलुं विलखउ डहरवार 1= तांगलिणी = = ? = === उदास, करमाई गयेलुं, फिक्कुं (सं. विलक्ष) (टि. 'म.गु.श. 'मां डहर मळविसर्जन करवुं ते. (टि. 'म.गु.श. 'मां 'तांगणी' छे.) गोईगोसली ? [प्रतिभाव्यम् ] व्याकुलता, खेद, चिंता [ उत्कलिकाकुलं रणरणकं वा] [अर्वाचीन ] (?) [पराचीनउ ] (?) [ विलक्ष: ] [ जयद्रथवेला ] (?) खाबोचियुं (सं. दहर :) मळे छे.) [ तनुगमनिका ] Jain Education International = पुञ्जो = ढगलो (सं. पुञ्ज) चउकीवटु = बाजोठ, बेसवानी पाट (सं. चतुष्कपट्ट:) वटवालनडं = वोळावियापणुं बेहडउं = बेडुं गूढउं = छानुं, घेरुं, न समजाय तेवुं (सं. गुह्य) खिसरहंडी ? (टि. 'म.गु.श. 'मां अर्वा गुज. अर्थ अंगे प्रश्नार्थ छे.) ऊकरडी = नानो ऊकरडो, विवाह प्रसंगे कचरो पूंजो नाखवानी जगा. (दे. उक्करडी) ३१ [सुधव ] [उत्तारितऋणम् ] [प्रतिभू] For Private & Personal Use Only [ गोप्यशिलाका ] [ अवकरोत्करिता ] [ अवकरः ] [ चतुष्कपट्टः ] [वर्त्मपालनं ] [द्विघटम् ] [गुदगूढम् ] [क्षिप्रसरहिंडिका ] www.jainelibrary.org

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