Book Title: Anusandhan 2008 12 SrNo 46
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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डिसेम्बर २००८
ऊंधाधलउं = ऊंधांधळं झांखुं, चूंखडुं, चंचळु, मंद दृष्टिवाळु [ उद्वलिकम् ] सूगामणउं = सूग उपजावनाएं, घृणास्पद (सं. 'शूक' परथी.) [सूकाजनकम् ] अहिवा विधवा (सं. अधवा)
[ अविधवा ]
सूहव = सौभाग्यवती, संधवा स्त्री (सं. सुधवा) उत्तरिण्यु = ऋणमुक्त (हिं. उतरिन)
पढू = जामीनगीरी आपनार, जामीन, जामीनदार (सं. प्रतिभूः > पडहू > पदू)
पडूचउं = जामीनगीरीमां मूकेली वस्तु ऊपरियामणउं उल्यु = ओल्युं, पेलुं
पयलउ = पेलो, पेलुं
विलखउ
डहरवार
1=
तांगलिणी
=
=
?
=
===
उदास, करमाई गयेलुं, फिक्कुं (सं. विलक्ष)
(टि. 'म.गु.श. 'मां डहर
मळविसर्जन करवुं ते.
(टि. 'म.गु.श. 'मां 'तांगणी' छे.)
गोईगोसली ?
[प्रतिभाव्यम् ]
व्याकुलता, खेद, चिंता [ उत्कलिकाकुलं रणरणकं वा]
[अर्वाचीन ] (?) [पराचीनउ ] (?) [ विलक्ष: ] [ जयद्रथवेला ] (?)
खाबोचियुं (सं. दहर :) मळे छे.)
[ तनुगमनिका ]
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=
पुञ्जो = ढगलो (सं. पुञ्ज)
चउकीवटु = बाजोठ, बेसवानी पाट (सं. चतुष्कपट्ट:) वटवालनडं = वोळावियापणुं
बेहडउं = बेडुं
गूढउं = छानुं, घेरुं, न समजाय तेवुं (सं. गुह्य) खिसरहंडी
?
(टि. 'म.गु.श. 'मां अर्वा गुज. अर्थ अंगे प्रश्नार्थ छे.) ऊकरडी = नानो ऊकरडो, विवाह प्रसंगे कचरो पूंजो नाखवानी जगा. (दे. उक्करडी)
३१
[सुधव ]
[उत्तारितऋणम् ] [प्रतिभू]
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[ गोप्यशिलाका ]
[ अवकरोत्करिता ]
[ अवकरः ]
[ चतुष्कपट्टः ]
[वर्त्मपालनं ]
[द्विघटम् ]
[गुदगूढम् ]
[क्षिप्रसरहिंडिका ]
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