Book Title: Anusandhan 2008 12 SrNo 46
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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३४
अनुसन्धान ४६
बगाई = बगासुं
[जृम्भिका] चीपडउ = चपटुं ?
[चिपट:] (टि. 'सार्थ जोडणीकोश' 'चीपहुं'नी व्युत्पत्ति प्रा. चिप्पड (= चपटुं) आपे छे. 'म.गु.श.'मां 'उक्तिर०' मांथी 'चीपडीउ, चीपिडउ' शब्द नोंधायेल छे. एनो अर्वा. गुज. अर्थ 'एक झेरी जीवडुं' मळे
छे. (सं. चिपिटकः) गूंहली = गरोळी
[गोमुखा] (टि. 'म.गु.श.'ने आ अर्थ विशे संशय छे.) कोसीढ(ट?)उ = रेशमनो कीडो ?
[कोषसमृद्धः] (टि. 'म.गु.श.'मां 'उक्तिर०'नो 'कोसीटउ' शब्द छे. अर्थ 'रेशमनो कीडो, एy कोकडु' मळे छे. त्यां संस्कृत पर्याय 'कोषस्थः'
अपायो छे.) चणहटी = कोई प्राणीनाम ?
[चणकप्रवर्तकः] (टि. 'म.गु.श.'मां आ शब्द 'चणहडीउ' रूपे 'उक्तिर०'माथी नोंधायेलो छे. अने त्यां एनो संस्कृत पर्याय 'चणकवर्तकः' अपायो
छे.) लउंकडी = लोंकडी (दे. लुंकडी)
[लोमकटिका] सवार = शीघ्र, सवेळा
[सवेला] कालाखरिउ = धीमेथी अक्षर शीखनार, वांचतां शीखवानुं शरू ज कर्यु होय तेवो. (सं. कालाक्षरिकः)
[कृष्णाक्षरितः] दाणीघणीउ = देवादार, करजदार
[ऋणतः] (टि. 'म.गु.श.' मां आ शब्द 'दाणी (घंणी), दाणीगणि' तरीके
नोंधायेलो छे.) त्रोटी = काननुं एक घरेणुं (रा.)
[त्रिपुटी] अजूयातउं = ?
[उद्मद्यमानम्] (?) (टि. 'अजूयालउं' शब्दनी संभावना. तो एनो अर्थ 'उजाळायेलु' थाय. (सं. उज्ज्वालयितुम्)
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