Book Title: Agam Sagar Kosh Part 03
Author(s): Deepratnasagar, Dipratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 19
________________ [Type text] आगम-सागर-कोषः (भागः-३) [Type text] णिप्पच्चक्खाणपोसहोववासा निर्ग्रन्थः। भग० ८९० अभिंतरबाहिरगंथणिग्गतो। निष्प्रत्याख्यानपौषधोपवासा-असत्पौरुष्यादिनियमा उत्त० २७७१ अविदयमानाष्टम्यादिपर्वोपवासाश्चे-त्यर्थः। जम्ब० णियंसेइ-नियस्ते-परिधत्ते। जीवा. २५३। १७१| णियइयाओ-नैयतिवयः-नियता न तु त्रिप्रभृतय इति णिप्पडिकम्मया-प्रशस्तयोगसङ्ग्रहायैव पञ्चैवेत्यर्थः। भग० ४४१ निष्प्रतिकर्मशरीरता सेवनीया, योगसङ्ग्रहे षष्ठो योगः। | णियए-नियतः एकस्वरूपत्वात्। भग० ११९। आव०६६३। णियगो-निजकः। उत्त०२२६। निजकः-गोत्रीयः। औप. णिप्पिवासो- निर्गतः पिपासाया वध्य प्रति स्नेहरूपाया ८९| इति निष्पिपासः। प्रश्न. ५ णियच्छति-नियच्छति निश्चयेन यच्छति-अवतरतिणिक्कडइ-निःसरति। दशवै०६११ युज्यते। सूत्र० ३५। गच्छति-प्राप्नोति। बृह० ७९ आ। णिप्फाव-औषधिविशेषः। प्रज्ञा० ३३। निष्पावाः-वल्लाः। । णियट्टिबायरो-क्षपकश्रेण्यन्तर्गतः क्षीणदर्शनसप्तको जम्बु. १२४॥ वल्ला। निशी. १४४ आ। निशी. १२० अ। जीवाग्रामो निवृत्तिबादरः, भूताग्रामस्याष्टमं णिप्फिडति-निस्सरति। आव० ९६। गुणस्थानम्। आव० ६५० णिप्फिडिओ-निष्काशितः। आव०४२६ णियडि-निकृतिः-बकवृत्त्या कुर्कुटादिकरणेन णिप्फिडिता-निर्गता। आव० ३४० दम्भप्रधानव-णिक्श्नोत्रीयसाध्वाकारेण परवञ्चनार्थं णिप्फिडिया-निर्गता। दशवै० ९८१ गलकतकानामिवाव स्थानम्। सूत्र० ३२९। परस्य णिप्फेडओ-निस्फेटः स्थानं स्वातन्त्र्यं वा। आव० ५१५ व्यञ्जकत्वेन अधि कायक्रिया णियडी। निशी० २८९ णिप्फेडियं- निष्कासितं भूमौ पातितम्। आव० ३६९। आ। णिप्फेडो-निर्गमः। आव० ३५५ णियमपगंप-नियमप्रकम्पः-कायोत्सर्गः। 5. १३०आ। णिब्बंधो-निर्बन्धः। आव. ५६५ णियमसा-नियमेन-अवश्यभावेन। उत्त०६५१, ५३५, णिब्बुडो-निमग्नः। आव० १८२ णिब्भरा-मत्ता। निशी० २२आ। णियमसो-नियमशः-नियमात्। उत्त०७६) णिमग्गजला-निमग्नं जलं यस्यां सा निमग्नजला। णियमारक्खिओ-सव्वपगईओ जो रक्खति सो णियमारजम्बू० २३० क्खिओ। निशी. १९५अ। णिमित्त-निमितं-अङ्गस्फूरितादि। प्रश्न. ४० निमित्तं | णियमो-निगमः-वणिग्जनप्रधानस्थानम्। प्रश्न०६९। अनागतार्थपरिज्ञानहेतर्ग्रन्थः। ओघ०१४| नियमः-पिण्डविशुद्ध्यादिउत्तरगुणः। णिमित्तिं-नैमित्तिकः। आव. ५६० द्रव्याद्यभिग्रहः। प्रश्न. १३२। अवश्यम्भावी। प्रश्न णिम्मंसा-निर्मांसा। ज्ञाता० ३३॥ णिम्मला-निर्मला-आगन्तुकमलरहिता। जम्बू. २१| णिययवित्ती-नियतवृत्तिः। व्यव० ३९१ अ। फुल्ला। निशी० १०३आ। अमिला। निशी० २५५ अ। | णियया-सदैव स्वस्वरूपा। व्यव० २७। णिम्मलो-निर्मलः-कठिनमलरहितः। औप० ११५ णियाग-णियगः-स्वजनः। निशी. १४०आ। नियागःणिम्माया-निष्णाता-निपुणा। आव० ६७४। मोक्षमार्गः सत्संयमो वा। सूत्र. २६६। संयमो विमोक्षो णिम्मिय-न्यस्तः। ज्ञाता०१४| वा। सूत्र० ३०२। णिम्मेरा-निर्मर्यादाः-अविदयमानकलादिमर्यादाः। जम्ब० | णियाणमरणे- ऋद्धिभोगादिप्रार्थना निदानं तत्पूर्वक १७१। मरणं निदानमरणम्। स्था० ९३। णिम्मोअणं-संठवणं। निशी० १२३ अ। णियोग-नियोगः-आज्ञा जम्बू. १६९। णियंठ-निर्गतो ग्रन्थात्-मोहनीयकर्माख्यादिति। णिरंगणो- निरञ्जनः-कौशाम्ब्यां राजमल्लः। उत्त. ५४४ १३३ मुनि दीपरत्नसागरजी रचित [19] "आगम-सागर-कोषः" [३]

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