Book Title: Agam 44 Nandisuyam Chulikasutt 01 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 11
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ||४८1148 नंदी - (१) परिघोलेमाणे तमेव जोइटाणं पासइ अन्नत्य गए न पासइ एवमेव अणाणुगामियं ओहिनाणंजत्येव समुपजइ तत्येव संखेन्जाणि वा असंखेझाणि वा संबद्धाणि वा असंबद्धाणि वा जोयणाई आगइ पासइ अन्नत्य गए न पासइ सेत्तं अणाणुगामियं ओहिनाणं 1991-11 (१४) से किं तं वड्दमाणयं ओहिनाणं वड्डमाणयं ओहिनाण-पसत्येसु अझवसाणहाणेसु यमाणस्स वट्टमाणचरितस्स विसुज्झमाणस्स विसुज्झमाणचरित्तस्स सव्दओ समंता ओही वड्टइ।१२-१1-12-1 (६५) जादइआ तिसमयाहारगस्स सुहमस्स पणगजीवस्स ओगाणा जहन्ना ओहीखेत्तं जहन्नं तु सव्वबहु अगणिजीया निरंतर जत्तियं भरिशंसु खेत्तं सव्वदिसागं परमोही खेत्त-निद्दिवो ||४९/1-49 अंगुलमावलियाणं भागसंखेन दोसु संखेज्जा अंगुलमावलियंतोआवलिया अंगुल-पुहत्तं ॥५01-50 हत्थम्मि मुहत्तंतो दिवसंतो गाउयम्मि बोद्धच्यो जोयणदिवसपुहत्तं पक्खंतो पत्रवीसाओ ॥५१151 मरहम्मि अधमासोजंबुद्दीवम्मि साहिओ मासो वासंच मणुयलोए वासपुहत्तं च रुयगम्मि ॥५२||-52 संखेजम्मि उ काले दीयसमुद्दा वि हुँति संखेशा कालम्मि असंखेजे दीवसमुदा उ भइयव्या ||५३-59 (७१) काले चउण्ड वुड्डी कालो मइयब्बु खेतवुड्डीए वुड्ढीए दव्यपञ्जव भइयब्बा खेतकाला उ ५४||-64 (७२) सुमोय होइ कालोतत्तो सुहुमयरयं हवइ खेत्तं अंगुलसेढीमित्ते ओसप्पिणिओ असंखेना ||५||-55 (७३) सेत्तं वड्टमाणयं ओहिनाणं ।१२-12 (७४) से किं तं हीयमाणयं ओहिनाणं हीयमाणयं ओहिनाणं अप्पसत्थेहिं अन्झवसाणट्ठाणेहिं वट्टमाणस्स यमाणचरित्तस्स संकिलिस्समाणस्स संकिलिस्समाणचरित्तस्स सन्चओ समंता ओही परिहायइसेत्तं हीयमाणयं ओहिनाणं 1१३1-19 (७५) से किं तं पडिवाइ ओहिनाणं पडिवाइ ओहिनाणं-जाणं जहणेणं अंगुलस्स असंखेज्जयभागं वा संखेज्जयभागं वा वालग्गं वा वालागपुहत्तं वा लिक्खं वा लिक्खपुहत्तं या जूयं वा जूयपुहत्तं वा जवं वा जवपुहत्तं वा अंगुलं वा अंगुल पुहतं वा पायं वा पायपहत्तं वा विहत्यिं वा विहत्यि पहत्तं वा रयणि वा रयणिपुहत्तं वा कुञ्छि वा कुच्छिपुहत्तं या घj वा धणपुहत्तं वा गाउयं वा गाउयपुहतं वा जयणं वा जोयणपुहत्तं वा जोयणसयं वा जोयण- सयपुहत्तं वा जोयण सहस्सपुहत्तं वा जोयणलक्खं वा जोयणलक्खपुहत्तं वा जोयणकोडिं वा जोयणकोडिपुहत्तं वा जोयणकोडाकोडिं वा जोयणकोडाकोडिपुहत्तं वा उक्कोसेणं लोगं वा-पासित्ताणं पडिवएज्जा सेत्तं पडिवाइ ओहिनाणं।१४।-14 (७६) से किं तं अपडिवाइ ओहिनाण अपडिदाइ ओहिनाणं-जेणं अलोगस्स एगपवि आगासपएस पासेजा तेण परं अपडियाइओहिनाणं सेत्तं अपडियाइ ओहिनाणं ।१५/-16 For Private And Personal Use Only

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