Book Title: Agam 44 Nandisuyam Chulikasutt 01 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 17
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandin I७७|477 | ७८11-78 ७९1-79 नंदी - (१२०) जाणइ अमुगे एस सुमिणे तओ अवायं पथिसइ तओ से उवगयं हयइ तओ धारणं पविसइ तओ णं धारेइ संखेन वा कालं असंखेझं वाकाल सेत्तं मल्लगदिद्रुतेणं।३६।-38 (१२१) तं समासओ चउब्विहं पत्रत्तं तं जहा- दबओ खेत्तओ कालओ भावओ तत्य दव्यओ गं आमिणिबोहियनाणी आएसेणं सवादवाई जाणइ न पाप्तइ खेत्तओ गं आभिणिबोहियनाणीआएसेणं सव्यं खेत्तं जाणइनपासइ कालओ णं आमिणिबोहियनाणी आएसेणं सब्वं कालं जाणइन पाप्तइ मावओ णं आभिणियोहियनाणी आएसेणं सव्ये मावे जाणइन पासइ ।३७-१1-38.1 (१२२) उपगह ईहावाओय धारणाएव हंति चत्तारि आभिणियोहियनाणस्स पेयवत्यू समासेणं ७५176 (१२३) अत्याणं उग्गहणंच उपग्रह तह वियालणं इस घवसायंच अवायंघरणंपुण धारणं बिति ॥७६||-78 (१२) उग्गह इक्कं समयंईहावाया मुहुतमचं तु ___ कालपसंखं संखंचधारणा होइ नायव्या (१२५) पुढे सुणेइ सई रूयं पुण पाप्तइ अपुढे तु गंध रसं च फासंघ बद्धपुष्टुं वियागरे (१२६) मासासमसेढीओ साईज सुणइ मोसयं सुणइ वीसेटी पुण सदं सुणेइनियमा पराघाए (१२५) ईहा अपोह वीमंसा मागणाय गवसणा सण्णा सई मई पत्रासद आभिणियोहियं 1८०|-80 (१२८) सेत्तं आभिणिबोहियनाणपरोक्खं ।३७-38 (१२९) से किं तं सुयनाणपरोक्खं सुयनाणपरोक्खं चोइसविहं पन्नतं तं जहा-अक्खरसुयं अणक्खरसुयं सण्णिसुयं असग्णिसुयं सम्मसुयं मिच्छसुयं साइयं अणाइयं सपञ्जयसियं अपनदसियं गमियं अगमियंअंगपविष्टुअनंगपयि₹३८1-37 (१०) से किं तं अक्खरसुयं अक्खरसुयं तिविहं पत्रतं तं जहा सण्णक्खरं वंजणखरं लद्धिअखरं, से किं तं सण्णखरं सण्णक्खरं-अक्खरस्स संठाणागिई सेतं सण्णक्खरं से किं तं वंजणक्खरं वंजणखरं-अक्खरस्स वंजणाभिलायो सेतं वंजणक्खरं से किं तं लद्धिअक्खरं लद्धिअक्खरं-अक्खरलद्धियस्स लशिअक्खरं समुप्पञ्जाइ तं जहा-सोइंदियलद्धिअक्खरं चक्खिदियलद्धिअक्खरं पाणिदियलद्धिअक्खरं रसणिदियलद्धिअखरं फासिदियलद्धिअक्खरं नोइंदिपलखिअक्खरं सेत्तं लद्धिअक्खरं सेतं अक्खरसुयं से किं तं अगस्खरसुयं अणखरसुयं अणेगविहं पत्रत्तं तंजहा)-३९-१1-38.1 (११) ऊससियं नीससियं निच्छूद खासियं च छीयंच निस्सिंघियमणुसारं अणक्खरं छेलियाईयं ॥८॥ (१३२) सेतं अणक्खरसुयं ।३९।-38 (१३३) से किं तं सण्णिसुयं, सण्णिसुयं तिविहं पन्नत्तं तं जहा-कालिओवएसेणं हेऊवएसेणं दिद्विवाओवएसेणं से किंतं कातिओवएसेणं कालिओयएसेणं-जस्सणं अत्थिईहा अपोहो परगणा गवेसणा चिंता वीसंसा-से णं सणीति लब्बइ जस्स णं नत्यि ईहा अपोझे मागणा गवसणा चिंता For Private And Personal Use Only

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