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करनेवाले। (इन दोनोंही,जिनवरोंको,प्रणिपात(नमन)करताहूं ।११ गाथा छंदहै । नष्टहुए, खराब, भाववाले। उनकुं, मैं, विपुल(मोटे),तपसे, करे। दोवि, जिणवरे, पणिवयामि ॥१॥ गाहा । ववगय,मंगुल, भावे। ते.ऽहं, विनल, तव,
निर्मल,स्वभाववाले। निरुपमर,महा(मोटे)प्रभाववाले । स्तनूंगा,अच्छीतरहदेखे,सदभाववाले३।२। गाथा। सर्व, दुःख प्रशांत होगये हैं। कनिम्मल,सहावे॥निरुवम, महप्पभावे। थोसामि, सुदिठ्ठ,साभावे ॥२॥गाहा।'सव्व.दुख्खप्पसंतीणं ।। ॐ सर्व,पाप प्रशांतहोगयेहैं जिनके । सदा,नहीं जोतानेवाले,शांतहए(ऐसे)। नमस्कारहो,अजित,शांतिनाथकुं।। श्लोक छंद। हे अजितजिन !,
सव्व, पावप्पसंतिणं॥ *सया, अजिय,संतीणं । नमो, अजिय,संतिण।।सिलोगो। अजियजिण!.. जमुखकुं,पवर्तानेवालाहै । तुमारे,पुरुषोमें उत्तम,नामका,कीर्तन(स्तवन)। वैसेही,धीरजता,मतिकुं,प्रवर्तानेवालाहै । तुमारा, तथा, हेजिनोत्तम,
‘सुह, प्पवत्तणं। तव, पुरिसुत्तम, नाम, कित्तणं॥ तहय, धिइ, मइ, प्पवत्तणं । तब, य, जिणुत्तम, में शांतिनाथ !,कीर्तन(स्मरण)।४। मागधिका छंद। "क्रियाओंके,विधि(करने)से,संचेहुए, कर्मके, क्लेशोंसे,विशेष छुडानेवाले । ५नहींजीतानेवाला,
संति!, कित्तणं ॥४॥मागहिया। 'किरिया, विहि,संचिय,कम्म,किलेस,विमुख्खयरं। "अजियं. भराहुआ,और, (ज्ञानादि)गुणोंसे,मोटे मुनियोंकी, सिद्धिकुं गया(पामा)हुआ । अजितनाथको, और, शांतिनाथ महामुनिको, इसीतरह, निचिअं. `च, गुणेहिं, "महामुणि, सिडि गयं ॥ “अजिअस्स. य. "संतिमहामुणिणो, 'ऽविय, १०३॥ अजित शांतिदोतीर्थकरोकुं । २अन्यकिसीकी ओपमा न लग सके वैसे । विद्यमान जीवाजीवादि पदार्थोको देखनेवाले । ४कायिकीआदि पांच,या पच्चिस 1 ५अन्यदेवोंसे । ६अणिमादिआठ
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