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________________ वष ३, किरण ३ ] ज्ञातवंशका रूपान्तर जोटवंश [ २४७ - "जाट न हूणों की संतान हैं, और न शक युद्धग्रन्थोंमें लम्बे क़द, सुन्दर चेहरा, पतली लम्बी सिथियनोंकी, किन्तु वे विशुद्ध आर्य हैं। ऊपरके नाक, चौड़े कन्धे, लम्बी भुजाएं, शेरकी सी कमर उद्धरण से यह पूर्णतया सिद्ध होजाता है, किन्तु और हिरनकीसी पतली टांगोंवाली जाति बतइससे भी अधिक गहरा उतरा जाय तो पता लाया है, (जैसी कि यह प्राचीन समयमें थी) चलता है, कि बेचारे हूणों और शकोंके आक्रमणों आधुनिक समयमें पंजाब, राजपूताना और का जबतक नाम-निशान तक न था, जाट उस काश्मीरमें खत्री, जाट और राजपूत जातियोंके समय भी भारतमें आबाद थे । पाणिनी जो ईसा नामसे पुकारी जाती है । ( पृष्ठ ३२ ) । से, प्रायः ८०० वर्ष पहिले हुआ है उसके व्याकरण मिस्टर नेसफील्ड साहबने यहांतक जोर ( धातु पाठ ) में 'जट' शब्द आता है, जिसके कि देकर लिखा है :माने संघके होते हैं। पंजाबमें 'जाट' की अपेक्षा “If appearance goes for anything 'जट' अथवा 'जट्ट' शब्दका प्रयोग अबतक होता the Jats could not but be Aryans." है। अरबी यात्री अलवरूनी तो यहाँ तक लिखता "यदि सूरत शकल कुछ समझी जानेवाली है कि 'श्रीकृष्ण' जाट थे। मि० ई० बी० हेवल चीज़ है, तो जाट सिवा आर्योंके कुछ और हो लिखते हैं: नहीं सकते।" - "Ethonographin investigations भाषाविज्ञान के अनुसार जातियोंके पहचाननेshow that the Indo-Aryan type desc- की जो तरकीब है, उसके अनुसार भी जाट आर्य ribed in the Hindu epic-tu tall. fair हैं। इसके प्रमाणमें मिस्टर सरहेनरी एम० इलि. complexioned, long headed race, यट के० सी० बी० "डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ दी रेसेज with narrow prominent noses, broad ऑफ दी नार्थ वेस्टर्ने प्राविसेज ऑफ इंडिया" shoulders, long arms, thin waists like में लिखते हैं :lion and thin legs like deer is now (as "बहत समय हुआ मैंने करांचीसे पेशावर तक it wis in the earliest times) most यात्रा करके स्वयम् अनुभव कर लिया है, कि जाट confined to Kashmere, the लोग कछ खास परिस्थितियोंके सिवा अन्य शेष Punjab and Rajputana and represen- जातियोंसे अधिक पृथक् नहीं है। भाषासे जो ted by the Kattris, Jets. and Rajp- कारण निकाला गया है वह जाटोंके शुद्ध आर्यवंश nts. (Page 32 ) The History of Ary- में होनेके जोरदार पक्षमें हैं। यदि वे सिथियनeu Rule in India by F. B. Havell. विजेता थे, तो उनकी सिथियन भाषा कहाँके लिए अर्थात्-मानवतत्वविज्ञानकी खोज बतलाती चली गई ? और ऐसा कैसे हो सकता है, कि वे है, कि भारतीय आर्यजाति जिसको कि हिन्दू. अब आर्य भाषाको, जोकि हिन्दीकी एक शाखा
SR No.527158
Book TitleAnekant 1940 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1940
Total Pages68
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size9 MB
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