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________________ 26) अ) तत्त्वार्थसूत्र 10.7 ब) कुमारपालप्रतिबोध, प्रस्ताव 3, पृ.२९८, भावनायां इलापुत्रकथा 27) आज्ञाऽपायविपाकसंस्थानविचया य धर्ममप्रमत्तसंयतस्य / तत्त्वार्थसूत्र 9.37 28) ज्ञाताधर्मकथा, श्रुतस्कन्ध 1, अध्ययन 12, परिखाजल दृष्टान्त 29) राजप्रश्नीय, पएसि-कहाणगं, सूत्र 748-763 毕业生学业奖学*** सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूचि 1) तत्त्वार्थसूत्र : वाचक उमास्वाति, विवेचक - पं. सुखलाल संघवी, पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी, 2001 2) सर्वार्थसिद्धि : आ.पूज्यपाद, मराठी अनुवाद व संपादन - प्रा. कंडारकर, शहा, पद्म प्रकाशन, पुणे, वी.नि.सं.२०३२ 3) नन्दीसूत्र : सं. मधुकर मुनि, आगमप्रकाशन समिति, ब्यावर (राजस्थान), 1991 4) उत्तराध्ययनसूत्र : नवसुत्ताणि 5, सं.आ. महाप्रज्ञ, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान), 1987 5) नायाधम्मकहाओ आणि विवागसुयं (ज्ञाताधर्मकथा) आणि (विपाकश्रुत) : अंगसुत्ताणि 3, सं.आ. महाप्रज्ञ, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान), 1992 6) रायपसेणियं आणि जीवाजीवाभिगम : उवंगसुत्ताणि 4, सं.आ. महाप्रज्ञ, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान), 1987
SR No.229740
Book TitleTattvartha Sutra me Nihit Gyan Charcha Ek Nirikshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKaumudi Baldota
PublisherKaumudi Baldota
Publication Year2013
Total Pages14
LanguageHindi
ClassificationArticle, 0_not_categorized, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size145 KB
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