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________________ t% A4 य चट्टानग्गेण निरया ॥ १२॥ तक्कयमिहकम्माणि य दूसइ रूसइखणे खणे जानहु तकरण दावइ जिस्कं निस्कायराणंपि ॥ १३ ॥ न सह तकरफासं पसत्यवत्यूष गेड्मनम्मि । जोयावइ न हुअन्नं मसंती वेरिणिं बहुश्यं ॥१॥ सो कोविनस्थि विण्ड जो साहिजा न ती सस्सूए । तहवि न तुस्सइ पस्सइ छिदं मूसी निखामुख ॥ १५॥ पाए परकाल सा श्रहन्नया तहवि पन्हियाइ हया। निपचिया य वाह रे उसु जाहि दूरेण ॥ १६॥ जइ संवाद अंग तीए इत्थाई तोऽवसारेइ । गेहवारं न मुयमा जरका खंम्गुम ॥ १७॥ न हु वंदा गुरुदेवे चिंतश् मणसावि नेव घम्मविहिं। पूर्व संजम्गपिहाणियाइ माइ संजरि॥१७॥रे कह जग्गा एसा उसा मुसा दोसमुखवा एसा। अकोसंती तीए वर्दु महारोसदोसवसा ॥ १५ ॥ चिघ सा जिसिरिया निहिरीया मुक्कजायमखाया । रोसेण धमधमंती मषे बहुश्रदोसफाषिक्षा ॥१०॥न दु पमिजास किंचिवि धासिरिया बहुखमा खमुब बहू । सवेण परियणेणं सुखि तवश्यरो सदो ॥१॥ विमलेपवि विनायं तहुविष्यसियमसेसमवि चित्ते। ज तेण उवाखा तो खग्गा संमुई चविदं ॥ १५॥ उबह कोहमसमं विसमं जं किंचि जंपए मदुरा (मुहरा)। सबेणवि तो चत्ता असलवन्नुव जिएसिरिया ॥ ३ ॥ सम्मइंसाजन मिहादसएमयम्मि कयनिघ। मोहबलेणुक्किा सा जाया धिपाविद्या ॥२३॥ जडणुब पऊखंती संपन्ना तिघरोसदासेण । इत्तो कोवि महिही सगी विमलसिकिस्स ॥३५॥ तागेहम्मि समे अहन्नया तेष जोयणे पिचा। दिश गिभिएणं अजंपिरि नियन्हुसं बहुहा ॥ २६॥ अकोसंती जिसिरिनामा बामाजिज्ञासणुम्मत्ता । तो तेणं वारियं मुहा कहंसिकसि इमीए ॥२७॥ कस्सेयं नषु गेह देहपिसासयं तदा खली। कश्वदिपावसान 242 %AAAAAAAKHA
SR No.090458
Book TitleUpdeshsaptatika
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages498
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Sermon
File Size13 MB
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