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________________ द्रव्य संग्रह प्र०-णमोकार मन्त्र जपते समय मन को स्थिर रखने का आय बताइये? उस-प्णमोकार मंत्र जाप्य के लिए आचार्यों ने मुख्य तीन विधियाँ बताई हैं-इनमें मन स्थिर हो जाता है-(१) पूर्वानुपूर्वी विधि, (२) पश्चातानुपूर्वी विधि, (३) यथातथ्यानुपूर्वी विधि । वैसे यह मन्त्र १८४३२ प्रकार से बोला जा सकता है। पूर्वानुपूर्वी विधि-गमोकार मन्त्र जैसा है उसी रूप मे पढ़ना । णमो अरहताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं । णमो उबतायाणं णमो लोए सव्यसाहूणं ।। ?म निधि को प्रायः आदत होने से मन चंचलता से इधर-उधर दौड़ लगाता है । अतः दुसरो विधि उपयोगो देखिये। पश्चातानुपूर्वी-पोछे से पहिये । णमोलोए सव्वसाहणं, णमो उवमायाणं । णमो आइरियाणं णमो सिवाणं णमो अरहताण ॥ इस विधि से भी आगे बढ़कर यथातथ्यानुपूर्वी-ऊपर से, नीचे में, मध्य से कहीं से भी पढ़िए । बस शर्त यही है कि पांच पद से अधिक न हों व कम भो न हों। जैसे—णमो अरहन्ताणं । णमो उवज्मायागं, णमो सिद्धार्ण, णमो आइरियाणं । शमी लोए सव्वसाहणं । कम से, आगे-पोछे दूसरा पद फिर तोसरा आदि क्रम से पढ़ने पर मन एकदम स्थिर हो जाता है । यह ध्यान को एक अमूल्य निधि है।
SR No.090157
Book TitleDravyasangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages83
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size1 MB
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