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________________ द्रव्य संग्रह प्र०-अस्ति किसे कहते हैं ? उ.-जो सदा विद्यमान रहे, जिसका कभी नाश नहीं हो, वह 'अस्ति' कहलाता है। प्र.-'आस्त' द्रव्य कितने हैं ? उ.--जीव, पुद्गल, धर्मादि छहों द्रव्य 'अस्ति' रूप हैं । प्र.-'काय' किसे कहते हैं ? 30-जो शरीर के समान बहुप्रदेशो हो उसे काय कहते हैं। प्र०-'काय' द्रव्य कितने हैं ? उ०-काल द्रव्य को छोड़कर शेष पाँच द्रव्य कायवान हैं। काल एकप्रदेशी हो है। प्र०-अस्तिकाय किसे कहते हैं ? उ०-जो अस्ति रूप भी हो तथा कायवान भी हो, वह अस्तिकाय है। प्र०-अस्तिकाय कितने हैं ? उ०-जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश पांच अस्तिकाय हैं। प्र.कालद्रव्य अस्तिकाय क्यों नहीं है ? उ-काल द्रव्य अस्ति रूप तो है किन्तु कायवान नहीं है अतः अस्तिकाय नहीं है। व्रव्यों के प्रदेशों की संख्या होति असंखा जीवे धम्माधम्मे अर्णत आपासे । मुत्ते तिविह पदेसा कालस्सेगो ण तेण सो काओ ॥२५॥ मन्बयार्थ (जीवे ) एक जोव में । (धम्माधम्म ) धर्म और अधर्म द्रव्य में । ( असंखा ) असंख्यात । (आयासे ) आकाश में। ( अणंत ) अनन्त । ( मुत्ते ) पुद्गल द्रव्य में । (तिविह) तीन प्रकार के संख्यात, असंख्यात और अनन्त । ( पदेसा ) प्रदेश । ( होति) होते हैं। ( कालस्स) कालद्रम्प का । ( एगो) केवल एक हो प्रदेश होता है। ( तेण) इसोलिए । ( सो) वह काल । (काओ) काय अर्थात् बहुप्रदेशी। (ण) नहीं है । एक जीवद्रव्य, धर्मद्रव्य, अषमंद्रव्य-तीनों के असंख्यात प्रदेश हैं।
SR No.090157
Book TitleDravyasangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages83
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size1 MB
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