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________________ तवारिख-तीर्थ-शत्रुजये. (७१) एकमंदिर गणधरपुंडरीकस्वामीका उसीसालका तामीरकियाहुवाऔर-आसपासइसके कइमंदिरछोटेबडेकायमहै. मंदिर शांतिनाथजीका-मंदिरसीमंधरस्वामीका-खिरनीकाटख्त--मंदिरमल्लिनाथजीकामंदिर अजितनाथजीका-मंदिरसंभवनाथजीका-मंदिरचंद्रप्रभुजीका और एकमंदिर छत्रपतिसंप्रति राजाका-तामीरकरवायाहुवा-मंदिर तीर्थकरअभिनंदनस्वामीका-जिसकोंबनेआज (२१२६ ) वर्षहुवे बडा पुरानाहै. अवलनोलिखचुकेहैकि-राजासंपतिने शत्रुजयपरमंदिर बनवायासो-यही-मंदिरहै, तीर्थोमेयह कदीमीरवाजहै कि-एक मंदिरपुरानाहोकरगिरगया किसीखुशनसीबने फिरतामीर करवाया, इसीकानामजीर्णोद्वारकहते है, औरइसीतरह तीर्थकायम-वा-दायम बनारहताहै, यहटोंक-सवटोंकसेंऊंची औरबालाहै. सबबकि-पहा. डकेऊंचेसीरपरबनीहुइहै. पहाडशत्रुजयकी ऊंचाइयहांपर खतमहुइ, करीब (२५) कोशकीदूरसें जोशत्रुजयतीर्थका मंदिरनजरआताहैबह-यहीमंदिरहै, तीनकोशकंधेरेमें नवटोंक-और-छोटेवडेतीनहजार मंदिरइसपहाडपर कायम-और-बरपाहै, इनमंदिरोंको औरटौंकोंकी चारोंतर्फ एकदिवारमानींद किलेकेबनीहुइ-नवटोंकोंके बडेबडेअठारांहफाटककइदरवजे-खीडकीयें-और-जानेआनेकेरास्ते-साफ और पाकवने हुवेहै. किसीयात्रीकों कोइतकलीफनही, हरटोंककेरास्तेरातकोंबंदकर दियेजातेहै, शत्रुजयपहाड जैनमंदिरोका-एकनायाबशहरहै, इतनेइफठेमंदिरएकजगहकहीनही देखोगे, मंदिरोंकेशिखर-धनाओंकाफरराना-घंटोंकी झनझनाट दिलको चकितकरदेती है, वडीबडीमर्तिके मस्तकपरहीरे-कंधे-हाथ-और घुटनोंपर मुन्नेकेपतेलगेहुवे निहायत खूबसुरती दिखलारहे है.-एकपहाडपर इतनेजैनश्वेतांबरमंदिरोंका जमावहफतेअकलीममें कहींनहीपाओगे. वैदिक और बौधलोगोकेइतने Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034925
Book TitleKitab Jain Tirth Guide
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUnknown
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages552
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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