________________ सोलहवां प्राभूत दोसिणाइयाणं लक्खणा सत्तरहवां प्राभूत चंद-सुरियाणं चवणोववाया 167 168 wo-or अठारहवां प्राभूत चंदाइच्चाईणं भूमिभागामो उडढत्तं ताराण अगत्ते तुल्लत्ते कारणाई चंदस्स मह-णखत्त-ताराणं परिवारो मंदरपब्वयाओ जोइसचार लोअंताग्रो जोइसठाण णक्खत्ताणं अब्भतराई चार चंद-सूर-गह-मक्खत्तविमाणाण संठाणाई चंद-सूर-गह-णक्खत्त-तारा-विमाणाणं पायाम-विक्खभ-परिक्खेव-बाहिल्लाई चंद-सुर-गह-णक्खत-ताराणं विमाणपरिवहणं जोइसियाणं सिग्घ-मंदगइपरूवण जोइसियाणं अय्प-महिडिढपरूवण ताराणं अबाहा अंतरपरूवणं चंदस्स अगमहिसीओ देवीपरिवार विउवणा य सूरस्स अग्गम हिसीनो देवीपरिवार विउवणा य जोइसियाणं देवाणं ठिई जोइसियाणं अप्पबहुत्तं 170 170 171 172 173 177 177 177 178 179 ~ 181 182 182 183 184 उन्नीसवां प्राभूत चंद-सूर-गह-शक्खत्त-ताराणं परिमाण जम्बुद्दीवो-जंबुहोवे जोइसियपरिमाण लवणसमुद्दो धायईसंडदीवे कालोए समुद्दे पुक्खरवरदीवे माणुसुतरे पब्बए अभितर-पुक्खरद्धे . समयक्खेत्ते अंतोमणुस्सखेत्ते जोइसियाणं उड्ढोबवण्णगाइपरूवणं पुब्बइंदस्स चवणाणंतरं अण्णइंदस्स उववज्जणं माणसखेत्तस्स बहिया जोइसियाणं उड़ढोववष्णगाइपरूवणं सेसाणं दीव-समुद्दाणं आयामा ~ ~ 15 ISIT ~ ~ 187 188 192 ~ 193 [ 47 ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org