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________________ 144 145 146 146 147 148 148 149 0 152 152 153 153 बारहवां प्राभत पंचण्ह संवच्छराणं मासाणं च राइदियमुहत्तप्पमाणं पढम णक्खत्तसंवच्छर बितियं चंदसंवच्छर ततियं उडुसंबच्छरं. च उत्थं प्राइच्चसंवच्छर पंचम अभिवडिढयसंवच्छरं एगस्स जुमस्स अहोरत्त-मुहत्तप्पमाणं पंचण्हं संवच्छराणं पारंभ-पज्जवसाणकालस्स समत्तपरूवणं उडणं णामाई कालप्पमाणं च / अवम-अइरित्तरत्ताणं संखा हेऊ च वासिक्कियासु पाउट्टियासु चंदेण सूरेण य पक्खत्तजोगकालो हेमतियासु प्रावट्टियासु चंदेण सूरेण य णक्खत्तजोगकालो जोगाणं चंदेण सद्धि जोग-परूवणं तेरहवां प्राभूत चंदमसो बड़ढोऽवड्ढी एगयुगे पुणिमासिणीग्रो अमावासामो चंदाइच्च अद्धमासे चंदाइच्चाणं मंडलचारं पढमे चंदायण दोच्चे चंदायणे तच्चे चंदायणे चौदहवां प्राभूत दोसिणा अधयारस्स य बहुत्तकारणं पन्द्रहवां प्राभूत चंद-सूर-गह-णखत्त-ताराणं गइपरूवर्ण चंद-सूर-गक्खत्ताणं विसेसगइपरूवण चंदस्स णक्खत्ताण य जोगगइपरूवर्ण चंदस्स गहाण य जोग-गइकालपरूवणं सूरस्स मक्खत्ताण य जोग-गइकालपरूवणं सूरस्स गहाण य जोग-गइकालपरूवणं कणक्खत्तमासे चंदस्स सूरस्स णक्वत्तस्स य मंडलचार ख-- चंदमासे चंदस्स सूरस्स मक्खत्तस्स य मंडलचारं ग-उडमासे चंदस्स सूरस्स णक्खत्तमासस्स य मंडलचारं घ–आइच्चमासे चंदस्स सूरस्स गक्खत्तस्स य मंडलचार हु-अभिवढियमासे चंदस्स सूरस्स णक्ख तस्स य मंडल चार एगमेगे अहोरत्ते चंद-सूर-मक्खत्तागं मंडलचारं एगमेगे मंडले चंद-सूर-अक्खत्ताणं अहोरसे चार एगमेगजुगे चंद-सूर-गक्खत्ताणं मंडल चार 154 155 157 X X X 159 rururur 161 162 162 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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