________________ 197 198 199 199 200 201 बीसवां प्राभूत चंदिम-सूरियाणं अणुभावो राहु-कम्मपरूवणं राहुस्स णव णामाई राहस्स विमाणा पंचवण्णा राहुस्स दुविहत्तं चंदस्स ससी-अभिहाणं सूरस्स आइच्चाभिहाणं चंद-सुराई णं काम-भोगपरूवणं प्रवासीई महम्गहा संगहणीगाहामो उपसंहारो सूयथविरपणीयं चंदपण्णत्तिसुत्तं परिशिष्ट श्री सूर्य-चन्द्रप्रज्ञप्तिसूत्र का गणितविभाग सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र 20 व 24 का परिशिष्ट 201 201 204 205 206 207 210 239 [48 ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org