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श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र का मुखपत्र
श्रुत सागर
आशीर्वाद : राष्ट्रसंत जैनाचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी म. सा. अंक : १ (प्रवेशांक) कार्तिक वि.सं. २०५२, अक्तूबर १९९५
प्रधान संपादक : मनोज जैन
संपादक : डॉ. बालाजी गणोरकर
आचार्य श्री कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर
उद्भव और आज प. पू. गच्छाधिपति आचार्य श्री कैलाससागरसूरीश्वरजी महाराज की अभिलाषा थी कि कोवा में प. पू. आचार्य देव श्री पद्मसागरसूरीश्वरजी के मार्गदर्शन में एक छोटा सा मंदिर और पठन-पाठन की सुविधा से युक्त ज्ञानमंदिर हो. फल स्वरूप १९८२ से पूज्यश्री की प्रेरणा से श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र आज अपनी विभिन्न शाखाओं प्रशाखाओं के साथ विकसित हो चुका है और विस्तरण कार्य प्रगति पर है.
अतिभव्य जिनालय एवं प.पू. गच्छाधिपति के नयनरम्य गुरू-मंदिर से
युक्त श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र की आत्मा आचार्यश्री कैलाससागर सूरि 24-10-15
ज्ञानमंदिर है. प्रारम्भ में कल्पित एक सामान्य ज्ञानमंदिर के बजाय विशालकाय १५.netr mur. me) ज्ञानमंदिर साकार किया गया और इसके निम्नलिखित पाँच विभाग अपनी Train Mirmancar miRर विकास यात्रा में निरंतर प्रगति कर रहें हैं. dawn rior trnatient, १. देवर्द्धिगणि क्षमाश्रमण हस्तप्रत भाण्डागार : इसमें लगभग २ लाख जान ne zing
से अधिक प्राचीन दुर्लभ हस्तलिखित शास्त्र-ग्रंथ हैं. यहाँ आगम, न्याय, दर्शन, over 9 wrong " vra vida योग, व्याकरण, इतिहास आदि विषयों से सम्बन्धित अद्भुत ज्ञान का सागर है.
अनेक हस्तलिखित ग्रंथ सुवर्ण व रजत से आलेखित तथा सैकड़ों सचित्र हैं. jor a more genererear) af al २.आर्य सुधर्मास्वामी श्रुतागार : इस ग्रंथालय में भारतीय संस्कृति, धर्म
y
एवं दर्शन के अतिरिक्त विशेष रूप से जैन धर्म से संबंधित लगभग ८० हजार
मुद्रित प्रतें एवं पुस्तकें हैं. .प
३. सम्राट सम्प्रति संग्रहालय : यहाँ पुरातत्य अध्येताओं और जिज्ञासु
दर्शकों के लिए पाषाण व धातु-मूर्तियाँ, ताड़पत्र व कागज पर चित्रित जैन मंदिर, ११ A, हायशम रोड, भवानीपुर, कलकत्ता ७०००२० पाण्डुलिपियों, लघुचित्र, पट्ट, विज्ञप्तिपत्र, काष्ठ तथा हस्तिदन्त से बनी
प्राचीन एवं अर्वाचीन अद्वितीय कलाकृतियों तथा शुत परम्परा का दर्शन करने ज्ञानमंदिर, कोबा की अहमदाबाद में शाखा...| वाली धर्मभाव एवं सांस्कृतिक उत्कर्ष दर्शाने वाली अन्यान्य पुरावस्तुओं को श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र, कोबा द्वारा संचालित आचार्यश्री
इस प्रकार आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक ढंग से प्रदर्शित किया गया है कि दृष्टा कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर की पूर्णकालिक शाखा श्री जैन संघ ज्ञान भंडार की
को अपनी भव्य संस्कृति के प्रति गौरव एवं आस्था दृढ़ हो सके तथा साथ स्थापना पालडी विस्तार में करना तय हुआ है. इस ज्ञान भंडार के द्वारा यहाँ | ही इन अमूल्य कलाकृतियों का उचित संरक्षण भी हो. संगृहित ग्रंथों को श्रमण भगवंतों एवं अहमदाबाद में नदी पार के विशाल जैन ४.आर्यरक्षितसूरि शोधसागर : इस अनुभाग के अन्तर्गत जैन परम्परा . श्रावक वर्ग को वाचन हेतु उपलब्ध कराया जाएगा.श्री महावीर जैन आराधना |
के अनुरूप जैन साहित्य के संदर्भ में गीतार्थ निश्रित शोध-खोल/ अध्ययनकेन्द्र के इस स्तुत्य प्रयास से समस्त जैन संघ लाभान्वित होगा एवं बाल तथा |
संशोधन हेतु यथासम्भव सामग्री व सुविधाओं को उपलब्ध करा कर उसे युवावर्ग में भी पुस्तकों के पठन-पाठन से धार्मिक भावना में अभिवृद्धि होगी. फिलहाल जब तक इस नवीन शाखा हेतु स्थान उपलब्ध नहीं होता तब तक
प्रोत्साहित करना व सरल/ सफल बनाना इस कार्यक्रम का प्रमुख ध्येय है. इसका संचालन पालडी में जैन मर्चेट सोसायटी स्थित गीतार्थ गंगा के भवन
यहाँ पंच प्रतिक्रमणसूत्र को हिन्दी एवं अंग्रेजी में अर्थ सहित मुद्रित करने के से करवाने का तय किया गया है.
(शेष पृष्ठ २)
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(उद्गार
(संपादकीय)
श्रुत सागर, कार्तिक २०५२
उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथा।
अलुब्धैः सह मित्रत्वं, कुर्वाणो न विनश्यति ।। इस संसार में उत्तम जनों के साथ संगती करने वाले, विद्वानों के साथ वार्तालाप करने वाले और निस्वार्थ व्यक्तियों के साथ मित्रता रखने वाले सुखी
आचार्य श्रीमद् पद्मसागरसूरीजी म.नी प्रवळ प्रेरणाथी निर्माण थयेल जिन होते हैं.
मंदिर, उपाश्रय तथा विश्वभरमां अद्वितीय सुंदर जे ज्ञानमंदिर... विगेरे सम्यग् दर्शन ने सम्यग् ज्ञानना कारणभूत कार्यनी भूरी भूरी अनुमोदना.
-आचार्य श्रीमेरुप्रभसूरि
खरेखर! रत्नत्रयीनी साधना माटे आ अनोखु अनुपम स्थान वन्यु छे, माननीय श्रुत भक्त,
एनी पूर्णता जैन संघने गौरवान्वित बनावशे. आपके करकमलों में पत्रिका का प्रथम अंक प्रस्तुत करते हुए अतीव हर्ष
- आचार्य श्रीमित्रानंदसूरि हो रहा है. इस पत्रिका का उद्देश्य श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र द्वारा संचालित
___ परमात्मा महावीर प्रभुनी नयनरम्य प्रतिमाथी मंडित कोवा तीर्थनी आचार्य श्रीकैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर सहित परिसर की प्रगति, उपलब्ध
स्पर्शनाथी खूब खूब आनंद आव्यो... अने एमांय ज्ञानभंडारना अमूल्य
नाथी खबखन सेवाओं, प. पू. राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी म. सा. से सम्बन्धित
| श्रुतसंग्रहने जोइने तो दिल गद्गद् वनी गयुं! समाचार, तथा जैन समाज की अन्यान्य गतिविधियों की जानकारी समस्त
प्रभु शासननो श्रुतज्ञाननो आ भव्य वारसो अनेक पुण्यात्माओने जैन संघ तथा विद्वानों तक पहुँचाना है.
सम्यक्ज्ञाननी प्राप्ति करावनारो बनी रहेशे एवो मात्र विश्वास नहीं पण पूरी इस पत्रिका द्वारा जैन धर्म दर्शन, न्याय, साहित्य सहित भारतीय संस्कृति
श्रद्धा छे. से वाचकों को परिचित कराया जाएगा. इस क्षेत्र में ज्ञानवर्धक लेखों द्वारा
- मुनि श्रीरत्नसुंदरविजयजी म. सा. जैन धर्म, दर्शन एवं साहित्य के प्रति वाचकों में अभिरूचि का वर्धन हो यह
...यहाँ का वातावरण आध्यात्मिकता की भावनाओं से अभिभूत है. दुर्लभ हमारा पूर्ण प्रयास रहेगा । इस संदर्भ में आपके सुझावों एवं सहयोग की हमें
ग्रन्थों का अनुठा संग्रह है. यह केन्द्र भारतीय संस्कृति का मूर्तिमंत प्रतीक है. सदैव आवश्यकता और प्रतीक्षा रहेगी।
पू.आचार्यश्री का संक्षिप्त व सारभूत उद्बोधन प्रेरणादायक रहेगा. वंदन सहित. परिचय
-भैरोसिंह शेखावत, मुख्य मंत्री, राजस्थान; कल्याणसिंह चौधरी, मुख्य मंत्री, उ. प्र.; (पृष्ठ १ का शेष)
वी.शांताकुमार, मुला मंत्री, सि.प्र.सुंदरलाल पटवा, मुख्य मंत्री, म. प्र. . लिए विशेष कार्यक्रम विकसित किया गया है. जिस पर प. पू. मुनिराज श्रीनिर्वाणसागरजी म. सा. कार्य कर रहें हैं. जैन धर्म विषयक मल्टी मीडिया व 'हाइपर टेक्स्ट' के माध्यम से कम्प्यूटर पर ज्ञान प्रदान करने वाला पाठ्यक्रम विकसित करने का आयोजन है एवं इस हेतु प्रायोगिक तौर पर एक नवीन प्रोग्राम विकसित किया गया है. इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति स्वशिक्षण | राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरि म. सा. का भव्य चातुर्मास ले सकता है. इसी अनुभाग के अन्तर्गत ज्ञानमंदिर में संगृहित हस्तिलिखित ___कलकत्ता) भवानीपुर में प.पू. राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी ग्रंथ तथा मुद्रित पुस्तको व पुरावस्तुओं हेतु बहूद्देशीय कम्प्यूटर सेवा उपलब्ध | महाराज का भव्य चातुर्मास चल रहा है. नियमित प्रवचन एवं विविध अनुष्ठानों है. यहाँ किसी भी पुस्तक, प्रत एवं कृति हेतु विशद् सूचीपत्र एवं विस्तृत सूचनाएँ | | में जैन समाज के साथ ही हिन्दु, मुस्लिम, इसाई तथा अन्यान्य सम्प्रदायों के कम्प्यूटराइज्ड की जाती है. पुस्तक प्रकाशन हेतु कम्पोजिंग का कार्य भी यहाँ | लोग उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं. १ दिसंबर को हावड़ा में प.पू. आचार्यश्री होता है.
की निश्रा में प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया है. ५. महावीर दर्शन (कला-दीर्घा) : भगवान महावीर के प्रेरणा दायक प्रसंगों को प्रदर्शित करने के लिए इस कला-दीर्घा का निर्माण प्रगति पर है. यहाँ भगवान | उपधान तप का आयोजन महावीर व उनकी अविच्छिन्न परंपरा में हुए तेजस्वीपुंज श्रमण व श्रावकों के
___ गांधीनगर] श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र, कोवा, गांधीनगर में प्रेरणादायक प्रसंगों को ध्वनि तथा प्रकाश व हलन-चलन से युक्त प्रतिमाओं
| गच्छाधिपति प.पू. आचार्यश्री विजयमेरूप्रभसूरीश्वरजी म. सा.के शिष्य पंन्यास द्वारा सजीवत करने का प्रयास किया जाएगा.
प्रवर श्री मानतुंगविजयजी गणि, पंन्यास प्रवर श्री इन्द्रसेनविजयजी गणि तथा सकल जैन संघ के अर्थ-व्यय एवं सद्भावना भरे परिश्रम को सार्थक बनाने
पंन्यास प्रवर श्री सिंहसेनविजयजी गणि की निश्रा में भव्य उपधान तप की के लिए आज पर्याप्त सन्दर्भो व साधन-सामग्रीयों के अभाव में अवरुद्ध वनती
आराधना आयोजित की गयी है. इसका कार्यक्रम इस प्रकार है : या टुट पड़ती शोध-खोल/ अध्ययन-संशोधन की प्रक्रिया को जीवन्त बनाते
प्रथम मुहूर्त : २९.११.९५, द्वितीय मुहूर्त : ०१.१२.९५ मालारोपण हुए उन प्रतिभाओं के विकास के समस्त अवसर प्रदान कर ऐसे पूजनीय साधु
का वरघोड़ा (शोभायात्रा) : १५.०१.९६, मालारोपण : १६.०१.९६. साध्वी भगवन्तों या गृहस्थों को सहायक बनना हमारी परम अभिलाषा है ताकि वे सकल जैन संघ के योग-क्षेम हेतु देश-काल के अनुरूप सुयोग्य मार्गदर्शन
विशेष जानकारी हेतु संपर्क सूत्र : प्रदान कर सकें और छिन्न-भिन्न होती हुई हमारी गौरवमयी परम्पराओं को ठोस
श्री सावरमती (रामनगर) जैन श्वेताम्बर मू. संध, आधार मिले.
मोटा दहेरासरजी, रामनगर, सावरमती, अहमदावाद - ५. ०
(वृत्तान्त सागर)
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श्रुत सागर, कार्तिक २०५२
कर्मयोग ग्रंथ सुभाषित
(पृष्ठ ४ का शेष) प्रयोग उन्होंने अनासक्त भाव से करने योग्य कर्त्तव्य के अर्थ में किया है और
कर्मयोग का सरल अर्थ गृहस्थ या साधुजीवन के लिए कर्त्तव्य बोध के रूप जहा सुई ससुत्ता, पडिया वि न विणस्सइ । में बताया है. उनका कथन है कि आत्मा के शुद्ध स्वरूप का साक्षी भाव से एवं जीवे ससुत्ते, संसारे न विणस्सइ ।।
दर्शन किया जाना चाहिए.
कर्मयोग ग्रंथ में कर्ताने अपनी उदार, विशाल और व्यापक दृष्टि से प्रवृत्ति (२९-५२, उत्तराध्ययनसूत्र)
और निवृत्ति, कर्मयोगी के लक्षण, कर्मयोग की आवश्यकता - महत्ता, कर्मयोग जिस प्रकार धागे में पिरोई हुई सुई यदि हाथ से किसी स्थान पर गिर की लौकिक क्रियाएँ, लोकोत्तर कर्म, आत्मा का स्वभाव, गुरूवंदन-प्रतिक्रमणभी जाये तो वह धागे से युक्त होने के कारण नष्ट नहीं होती, खो नहीं जाती. प्रत्याख्यान आदि आवश्यक क्रियाएँ, विवेक, उद्यम, फर्ज, सत्य, हर्ष, शोक, उसी प्रकार ज्ञानरूपी सत्र (धागे) से यक्त आत्मा संसार में नष्ट भ्रष्ट नहीं होती. आत्मा, परमात्मा, गुरू-शिष्य, क्रोधादि कषाय, ब्रह्मचर्य, श्रद्धा, सेवा संकल्प, खो नहीं जाती.
मानवता, परोपकार, सदाचार, मैत्री आदि चार भावनायें इत्यादि अनेक विषयों की विस्तृत चर्चा प्राचीन, अर्वाचीन, पौराणिक, ऐतिहासिक आदि दृष्टान्त देकर तथा पूर्वाचार्यों के ठोस वचनों का उदरण देकर की है.
यह ग्रंथ वास्तव में सभी साधु-साध्वियों एवं श्रावकों के लिए पठनीय है, अरिहंत, सिद्ध, साहू, केवलिकहिओ सुहाबहो धम्मो।।
श्लोक सरल संस्कृत भाषा में हैं. गुजराती व्याख्या का हिन्दी अनुवाद बहुत
ही धारावद्ध लगता है. विषय का क्रम कहीं भी टूटता नहीं है, एए चउरो चउगइहरणा सरणं लहइ धन्नो।।।
___लोकमान्य तिलक ने इस ग्रंथ के विषय में प. पू. गुरूदेव को लिखा था [चउसरण पयन्ना, आचार्य श्रीवीरभद्रजी]] - “मुझे ज्ञात रहता कि आप कर्मयोग लिख रहे हैं तो मुझे मेरा कर्मयोग लिखने अरिहंत, सिद्ध, साधु तथा केवली परमात्मा के द्वारा कथित धर्म की शरण
की आवश्यकता ही न रहती. आपके कर्मयोग के सामने मेरा कर्मयोग नहीं शाश्वत सुख को देने वाली है. ये चारों शरण नरक, तिर्यंच, मनुष्य तथा देव
टिक सकेगा."
ग्रंथनाम : कर्मयोग, कर्ता : योगनिष्ठ आचार्य श्रीमद् बुद्धिसागरसूरि, इन चारों गतियों का नाश कर मुक्ति देने वाली है; किन्तु कोई विरला धन्य
अनुवादक : गणिवर्य श्री देवेन्द्रसागरजी महाराज, प्रकाशक : अष्टमंगल व्यक्ति ही इन शरणों को स्वीकार कर पाता है.
फाउण्डेशन, अहमदाबाद, वर्ष : १९९४, मूल्य : रु. ३५१/-. .
ओई विरला धन अनुवादक : गाव
Best Wishes for a Happy & Prosperous New Year
Sohanlal Chowdhary
Chairman
Santosh Maize & Industries Ltd. - Santosh Starch Products Ltd.
Santosh Securities Ltd. Sohanlal Gautam Mahavir Chowdhary Charitable Trust, Alunedabad Sri Mahavir Jain Aradhana Kendra, Koba, Gandhinagar Sri Siwana Jivdaya & Manav Sewa Samiti, Alimedabad.
Vice Chairman
Sri Laxmi Co-Operative Bank Ltd., Ahmedabad Board Member
Rajasthan Sewa Samiti, Ahmedabad • TheGujarat Research & Medical Institute, Ahmedabad Trustee
Sri Jain Swetamber Nakoda Parswanath Tirth, Mewanagar, (Raj. Sri Jaistmer Lodrapur Parswanath Jain Swetamber Trust, Jaislmer
Office:71. NewCloth Market, Ahmedabad-380002 Resi. : 13, Mahavir Society, Nr. Gajrawala Flats,
Paldi, Ahmedabad - 380 007
Phones : (0)2141933,2142854. (R)6639300,6639301.1
(F)5890071,5890072,5890073. Fax: (Factory)5890060. (Res.)411884. Telex: 121-6117 SOHN IN
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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir श्रुत सागर, कार्तिक 2052 (आचार्यश्री कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर ग्रंथावलोकन .. का कम्प्यूटराइजेशन प्रोजेक्ट योगनिष्ठ आचार्य श्रीमद् बुद्धिसागरसूरीश्वरजी कृत कर्मयोग ग्रंथ श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र संचालित आचार्यश्री कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर में द्वितीय तल पर आर्यरक्षितसूरि शोधसागर (कम्प्यूटर केन्द्र) स्थित | भारत वर्ष जिस समय गुलामी की जंजीरों को तोड़कर स्वतंत्र होने के | लिए लालायित था. उसी समय आत्मा के पारतंत्र्य से स्वतंत्रता प्राप्त करने है. यह केन्द्र एक सर्वर सहित आठ कम्प्यूटर, एक स्केनर, तीन प्रिन्टर से सुसज्जित है, ज्ञानमंदिर में स्थित दो लाख से ज्यादा हस्तप्रतों तथा लगभग 80 के लिए धर्मनेता भी प्रयत्नशील थे. इन दोनों प्रकार का नेतृत्व एक महान जैनाचार्य ने किया था जिनका नाम 125 ग्रंथों के प्रणेता के रूप में बड़े ही हजार मुद्रित प्रतों एवं पुस्तकों के विशाल संग्रह से सम्बन्धित विविध सूचनाओं आदर के साथ लिया जाता है वे हैं -तत्त्व-मर्मज्ञ.विद्वन्मर्धन्य योगनिष्ठ जैनाचार्य को इन कम्प्यूटरों के द्वारा उपलब्ध कराये जाने की योजना है. श्रीमद् बुद्धिसागरसूरीश्वरजी महाराज. सभी ग्रन्थों एवं उनमें अन्तर्निहित कृतियों का कम्प्यूटराइजेशन एक बहुत मानव समाज को पतन के गर्त में जाते वे देख न सकें.लोक जागरण वड़ा प्रोजेक्ट है. कम्प्यूटर की सहायता से हम किसी भी पुस्तक का प्रकाशन के लिए वे जनता के बीच गए. अपने प्रवचनों एवं उपदेशों के साथ ही उन्होंने नाम, कृति नाम, लेखक, टीकाकार, सम्पादक, संशोधक, अनुवादक, विषय, कलम भी उठाई. कलम की शक्ति सभी जानते ही हैं. उन्होंने क्रांतिकारी विचारों प्रकाशक आदि के आधार पर कुछ ही क्षणों में सम्पूर्ण सूचना प्राप्त कर सकते द्वारा मानव समाज को जगाने का पूरा प्रयास किया. 'कर्मयोग ग्रंथ उनकी हैं जो रजिस्टरों अथवा कार्डों द्वारा प्राप्त नहीं हो पाती. कर्ता की गुरू परम्परा | क्रांतिकारी विचारधारा का ही फल था. जिस किसीने भी इस ग्रंथ का अनुशीलन की माहिती एकत्र करनी भी इस प्रोजेक्ट का एक विशेष भाग है.प्रकाशन सिरीज | किया है वह आश्चर्यचकित हो जाता है. तथा विषयों के आधार पर भी पुस्तकों की शोध की जा सके इसके लिए यहाँ मूल कर्मयोग प. पू. गुरूदेव ने 272 संस्कृत श्लोकों में लिखा है जिस कार्य चल रहा है.एक पुस्तक में अन्य कई असम्बद्ध कृतियाँ भी प्रकाशित होती| पर उनकी खद की गुजराती भाषा में विस्तृत व्याख्या है. इस व्याख्या का सुगठित हैं. इनके विषय में परम्परागत पद्धति में सूचना प्राप्त करना दुष्कर हो जाता | संक्षिप्त अनुवाद प.पू.आचार्यश्री पद्मसागरसूरि म. सा. की प्रेरणा से हिन्दी है, लेकिन इस प्रकार की रचनाओं के लिए पेटा-कार्ड योजना बनाई गई है. भाषा में आपश्री के विद्या व्यसनी प्रशिष्य गणिवर्य श्रीदेवेन्द्रसागरजी के सत् इसके अन्तर्गत ऐसी सभी कृतियों के अलग-अलग कार्ड भरे जाते हैं, जिनका | प्रयासो द्वारा किया गया है.. कम्प्यूटरीकरण करने से इनके कृति नाम, कर्ता तथा आदिवाक्य से यह कृति योगनिष्ठ गुरूदेव आचार्यश्री बुद्धिसागरसूरि महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता किस ग्रंथ में तथा किन पृष्ठों पर है यह सूचना सरलता से उपलब्ध हो जाती | का छः वार अध्ययन किया था. उनकी दृष्टि उदार और समन्वयवादी होते है. अभी तक मुद्रित प्रतों एवं पुस्तकों के लगभग 75 प्रतिशत कार्यों तथाहुए भी शास्त्रीय थी. इस ग्रंथ में कर्म के सिद्धान्तों का व्यावहारिक जीवन में 37,000 हस्तप्रतों के विवरण को कम्प्यूटर में प्रविष्ट किया जा चुका है. अभी | विनियोग करने पर बल दिया है.जैन एवं हिन्दू परिभाषा में कर्म शब्द विभिन्न लगभग 1,75,000 हस्तप्रतों के विवरण कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने बाकी हैं. अर्थों में प्रयुक्त हुआ है. योगनिष्ठ गुरूदेव ने इस ग्रंथ में 'कर्म' शब्द की जैन कम्प्यूटर सेवा के लिये श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र परिसर में | एवं हिन्दु परिभाषाओं का बहुत ही सुन्दर समन्वय किया है. कर्म शब्द का LAN (Local Area Network) स्थापित किया गया है. इस कारण परिसर (शेष पृष्ठ 3) में स्थित किसी भी कक्ष अथवा भवन में स्थित कम्प्यूटर पर कोई भी सूचना पर उपलब्ध सभी सूचनाएँ देवनागरी, गुजराती, गुरुमुखी (पंजावी), आसामी, प्राप्त की जा सकती है एवं किसी भी कम्प्यूटर द्वारा सूचनाओं की प्रविष्टि वंगाली, ओरिया, तमिल, तेलगु, मलयाली, कन्नड, रोमन, रशियन आदि लिपियों की जा सकती है. Transcript Card (Gist Card) द्वारा इस केन्द्र में कम्प्यूटर में भी देखी जा सकती हैं. (शेष अगले अंक में) बधाई : Book Post / Printed Matter 0 "ज्ञानमंदिर के इस नये प्रयास हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ. श्रुत सागर पत्रिका अपने लक्ष्य की पूर्ति कर समस्त संघ के लिए लाभदायी सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास है." - प. पू. पं. प्रवर प्रद्युम्नविजयजी म. सा. 0 "आचार्यश्री कैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर द्वारा श्रुत सेवा के लिए प्रारम्भ | To की गई पत्रिका श्रुत सागर निरन्तर प्रगति करे एवं लोकप्रिय वने ऐसी हार्दिक कामना." -श्री शांतिलाल मोहनलाल शाह, ट्रस्टी, श्रीमहावीर जैन आराधना केन्द्र If undelivered please return to : Shrut Sagar Printed at: Naishadh Printers, Naranpuragam, Ahmedabad-380013 7471627 Published by: Secretary, Shree Mahavir Jain Aradhana Kendra, Koba, Gandhinagar-382009.0(02712)76204,76205,76252 Sri Mahavir Jain Aradhana Kendra Koba, Gandhinagar- 382 009 (India) RAM For Private and Personal Use Only