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(उद्गार
(संपादकीय)
श्रुत सागर, कार्तिक २०५२
उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथा।
अलुब्धैः सह मित्रत्वं, कुर्वाणो न विनश्यति ।। इस संसार में उत्तम जनों के साथ संगती करने वाले, विद्वानों के साथ वार्तालाप करने वाले और निस्वार्थ व्यक्तियों के साथ मित्रता रखने वाले सुखी
आचार्य श्रीमद् पद्मसागरसूरीजी म.नी प्रवळ प्रेरणाथी निर्माण थयेल जिन होते हैं.
मंदिर, उपाश्रय तथा विश्वभरमां अद्वितीय सुंदर जे ज्ञानमंदिर... विगेरे सम्यग् दर्शन ने सम्यग् ज्ञानना कारणभूत कार्यनी भूरी भूरी अनुमोदना.
-आचार्य श्रीमेरुप्रभसूरि
खरेखर! रत्नत्रयीनी साधना माटे आ अनोखु अनुपम स्थान वन्यु छे, माननीय श्रुत भक्त,
एनी पूर्णता जैन संघने गौरवान्वित बनावशे. आपके करकमलों में पत्रिका का प्रथम अंक प्रस्तुत करते हुए अतीव हर्ष
- आचार्य श्रीमित्रानंदसूरि हो रहा है. इस पत्रिका का उद्देश्य श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र द्वारा संचालित
___ परमात्मा महावीर प्रभुनी नयनरम्य प्रतिमाथी मंडित कोवा तीर्थनी आचार्य श्रीकैलाससागरसूरि ज्ञानमंदिर सहित परिसर की प्रगति, उपलब्ध
स्पर्शनाथी खूब खूब आनंद आव्यो... अने एमांय ज्ञानभंडारना अमूल्य
नाथी खबखन सेवाओं, प. पू. राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी म. सा. से सम्बन्धित
| श्रुतसंग्रहने जोइने तो दिल गद्गद् वनी गयुं! समाचार, तथा जैन समाज की अन्यान्य गतिविधियों की जानकारी समस्त
प्रभु शासननो श्रुतज्ञाननो आ भव्य वारसो अनेक पुण्यात्माओने जैन संघ तथा विद्वानों तक पहुँचाना है.
सम्यक्ज्ञाननी प्राप्ति करावनारो बनी रहेशे एवो मात्र विश्वास नहीं पण पूरी इस पत्रिका द्वारा जैन धर्म दर्शन, न्याय, साहित्य सहित भारतीय संस्कृति
श्रद्धा छे. से वाचकों को परिचित कराया जाएगा. इस क्षेत्र में ज्ञानवर्धक लेखों द्वारा
- मुनि श्रीरत्नसुंदरविजयजी म. सा. जैन धर्म, दर्शन एवं साहित्य के प्रति वाचकों में अभिरूचि का वर्धन हो यह
...यहाँ का वातावरण आध्यात्मिकता की भावनाओं से अभिभूत है. दुर्लभ हमारा पूर्ण प्रयास रहेगा । इस संदर्भ में आपके सुझावों एवं सहयोग की हमें
ग्रन्थों का अनुठा संग्रह है. यह केन्द्र भारतीय संस्कृति का मूर्तिमंत प्रतीक है. सदैव आवश्यकता और प्रतीक्षा रहेगी।
पू.आचार्यश्री का संक्षिप्त व सारभूत उद्बोधन प्रेरणादायक रहेगा. वंदन सहित. परिचय
-भैरोसिंह शेखावत, मुख्य मंत्री, राजस्थान; कल्याणसिंह चौधरी, मुख्य मंत्री, उ. प्र.; (पृष्ठ १ का शेष)
वी.शांताकुमार, मुला मंत्री, सि.प्र.सुंदरलाल पटवा, मुख्य मंत्री, म. प्र. . लिए विशेष कार्यक्रम विकसित किया गया है. जिस पर प. पू. मुनिराज श्रीनिर्वाणसागरजी म. सा. कार्य कर रहें हैं. जैन धर्म विषयक मल्टी मीडिया व 'हाइपर टेक्स्ट' के माध्यम से कम्प्यूटर पर ज्ञान प्रदान करने वाला पाठ्यक्रम विकसित करने का आयोजन है एवं इस हेतु प्रायोगिक तौर पर एक नवीन प्रोग्राम विकसित किया गया है. इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति स्वशिक्षण | राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरि म. सा. का भव्य चातुर्मास ले सकता है. इसी अनुभाग के अन्तर्गत ज्ञानमंदिर में संगृहित हस्तिलिखित ___कलकत्ता) भवानीपुर में प.पू. राष्ट्रसंत आचार्य श्रीपद्मसागरसूरीश्वरजी ग्रंथ तथा मुद्रित पुस्तको व पुरावस्तुओं हेतु बहूद्देशीय कम्प्यूटर सेवा उपलब्ध | महाराज का भव्य चातुर्मास चल रहा है. नियमित प्रवचन एवं विविध अनुष्ठानों है. यहाँ किसी भी पुस्तक, प्रत एवं कृति हेतु विशद् सूचीपत्र एवं विस्तृत सूचनाएँ | | में जैन समाज के साथ ही हिन्दु, मुस्लिम, इसाई तथा अन्यान्य सम्प्रदायों के कम्प्यूटराइज्ड की जाती है. पुस्तक प्रकाशन हेतु कम्पोजिंग का कार्य भी यहाँ | लोग उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं. १ दिसंबर को हावड़ा में प.पू. आचार्यश्री होता है.
की निश्रा में प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया है. ५. महावीर दर्शन (कला-दीर्घा) : भगवान महावीर के प्रेरणा दायक प्रसंगों को प्रदर्शित करने के लिए इस कला-दीर्घा का निर्माण प्रगति पर है. यहाँ भगवान | उपधान तप का आयोजन महावीर व उनकी अविच्छिन्न परंपरा में हुए तेजस्वीपुंज श्रमण व श्रावकों के
___ गांधीनगर] श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र, कोवा, गांधीनगर में प्रेरणादायक प्रसंगों को ध्वनि तथा प्रकाश व हलन-चलन से युक्त प्रतिमाओं
| गच्छाधिपति प.पू. आचार्यश्री विजयमेरूप्रभसूरीश्वरजी म. सा.के शिष्य पंन्यास द्वारा सजीवत करने का प्रयास किया जाएगा.
प्रवर श्री मानतुंगविजयजी गणि, पंन्यास प्रवर श्री इन्द्रसेनविजयजी गणि तथा सकल जैन संघ के अर्थ-व्यय एवं सद्भावना भरे परिश्रम को सार्थक बनाने
पंन्यास प्रवर श्री सिंहसेनविजयजी गणि की निश्रा में भव्य उपधान तप की के लिए आज पर्याप्त सन्दर्भो व साधन-सामग्रीयों के अभाव में अवरुद्ध वनती
आराधना आयोजित की गयी है. इसका कार्यक्रम इस प्रकार है : या टुट पड़ती शोध-खोल/ अध्ययन-संशोधन की प्रक्रिया को जीवन्त बनाते
प्रथम मुहूर्त : २९.११.९५, द्वितीय मुहूर्त : ०१.१२.९५ मालारोपण हुए उन प्रतिभाओं के विकास के समस्त अवसर प्रदान कर ऐसे पूजनीय साधु
का वरघोड़ा (शोभायात्रा) : १५.०१.९६, मालारोपण : १६.०१.९६. साध्वी भगवन्तों या गृहस्थों को सहायक बनना हमारी परम अभिलाषा है ताकि वे सकल जैन संघ के योग-क्षेम हेतु देश-काल के अनुरूप सुयोग्य मार्गदर्शन
विशेष जानकारी हेतु संपर्क सूत्र : प्रदान कर सकें और छिन्न-भिन्न होती हुई हमारी गौरवमयी परम्पराओं को ठोस
श्री सावरमती (रामनगर) जैन श्वेताम्बर मू. संध, आधार मिले.
मोटा दहेरासरजी, रामनगर, सावरमती, अहमदावाद - ५. ०
(वृत्तान्त सागर)
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